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17 जनवरी, 2021|12:16|IST

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बांध नहीं बना तो मिट जाएगा पत्थरघट्टी पंचायत का अस्तित्व

बांध नहीं बना तो मिट जाएगा पत्थरघट्टी पंचायत का अस्तित्व

दिघलबैंक। एक संवाददाता

समय रहते अगर कनकई नदी पर बांध नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में दिघलबैंक प्रखंड के पत्थरघट्टी पंचायत के लोगों की मुश्किलों को बहुत अधिक बढ़ा सकती है। हालात अगर 2017 और 2020 के तरह ही रहे तो अगले वर्ष ही कनकई नदी के इस नये धार से होकर ही पूरी कनकई नदी बहने लगेगी और ऐसे में पत्थरघट्टी पंचायत के ग्वाल टोली, दोदरा, कमरखोद, गुआबाड़ी, बलवाडांगी , बेलबाड़ी, कुढ़ैली ,आदिवासी टोला आदि गांवों का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। यही नहीं नदी के इस बदले धार ने इसी वर्ष करीब 1 करोड़ 42 लाख कि लागत से गुवाबाड़ी के पास बने बने पुल को भी उदघाटन से पहले ही धारासायी कर दिया और अगर नदी का यही तांडव अगले वर्ष भी जारी रहा तो दिघलबैंक ,टेढ़ागाछ और बहादुरगंज के दर्जनों गांव, पुल पुलिया और सड़क इसके चपेट में होगा तथा इन ईलाकों में कनकई नदी एक नये रास्ते से बहने लगेगी। जिसका व्यापक नुकसान पूरे क्षेत्र के लोगों को उठाना होगा। अमूमन बारिश के मौसम में तटवर्ती ईलाकों के लोगों को बाढ़ और कटाव जैसी समस्याओं से रूबरू कराने वाला कनकई नदी ने इस बार तो अपने नये धार के साथ दिसंबर जैसे महीने में भी दोदरा गांव के पास कटाव जारी रखा है और स्थानीय निवासी अरूण कुमार बोसाक कि मानें तो अगर प्रशासन ने अविलंब ध्यान नहीं दिया तो दोदरा गांव के लतीफ, मुस्लिम, जहीरुद्दीन एवं साबिर आलम जैसे गरीब परिवारों का मकान नदी के इस नये धार में समा जायेगा। गौरतलब है कि इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों ने बार बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ग्वाल टोली के पास बांध बनाने का आग्रह किया था और अगर समय रहते किसी माध्यम से यह कार्य हो गया रहता तो आज न तो ग्वाल टोली के तीन दर्जन से अधिक परिवार विस्थापित होते और न ही नदी अपना रूख बदलती। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और अंजाम सामने है । कनकई नदी ने एक नये धार के सहारे ग्वाल टोली से पूरब पत्थरघट्टी पंचायत के बीचों बीच अपना एक नया रास्ता बना लिया है और लोगों की मानें तो अगर प्रशासन अब भी नहीं जगी तो आने वाले वर्षों में पत्थरघट्टी पंचायत का लगभग सभी गांव नदी के चपेट में होगा। यही नहीं नदी के इस नये रास्ते की वजह से टेढ़ागाछ और बहादुरगंज प्रखंड के भी दर्जनों गांव पर खतरा के बादल मंडाराने लगे है। गौरतलब है कि दिघलबैंक प्रखंड के पत्थरघट्टी पंचायत में पिछले एक दशक से तबाही मचा रहे कनकई नदी के कारण हीं कभी पत्थरघट्टी पंचायत के पश्चिमी छोड़ पर बसा काशीबाड़ी (टेढ़ागाछ) , कचना बस्ती तथा मालप्रति जैसे सैकड़ों परिवार वाले गांवों का आज नामो निशान नहीं है। ये गांव करीब एक दशक पूर्व हीं कनकई नदी में समा चुका है। जबकि ग्वाल टोली गांव से पिछले चार वर्षों में करीब चार दर्जन परिवार नदी के कटाव के कारण गांव से विस्थापित हो चुका है। इसके बावजूद आज तक किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक पदाधिकारी द्वारा नदी से हो रहे तबाही को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही कारण है कि फिलहाल पूरे पंंचायत के लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है।

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  • Web Title:If the dam is not built then the existence of stone-pelting panchayat will disappear