
बजट से चायपत्ती व अनानास किसानों को उम्मीदें
बजट से चायपत्ती व अनानास किसानों को उम्मीदें बजट से चायपत्ती व अनानास किसानों को उम्मीदें बजट से चायपत्ती व अनानास किसानों को उम्मीदें
ठाकुरगंज। निज संवाददाता ठाकुरगंज क्षेत्र में चायपत्ती, अनानास की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है और यह इलाका वर्षों से अपनी गुणवत्ता पूर्णउपज के लिए जाना जाता है। क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि पर चायपत्ती व अनानास की खेती हो रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मंडी की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे किसानों को परिवहन में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है और उन्हें उनकी उपज का समुचित मूल्य नहीं मिल पाता। बिहार सरकार के बजट से चायपत्ती व अनानास किसानों को काफी उम्मीदें हैं।
सीएम नीतीश कुमार ने किशनगंज को टी सिटी बनाने की वर्षों पहले घोषणा की थी। स्थानीय किसानों के अनुसार, पूर्व में सरकार द्वारा अनानास की खेती को बढ़ावा देने के लिए कुछ अनुदान दिया जाता था, जो अब बंद हो चुका है। इसके बावजूद ठाकुरगंज के किसान कठिन परिस्थितियों में भी अनानास की खेती कर न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में बल्कि पड़ोसी देशों तक अपनी उपज भेज रहे हैं और क्षेत्र की पहचान बना चुके हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ठाकुरगंज पहुंचे थे और यहां अनानास की खेती देखकर प्रभावित हुए थे। उस दौरान क्षेत्र में अनानास आधारित फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन यह घोषणा अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। किसानों का कहना है कि यदि फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होता, तो उन्हें बेहतर बाजार, उचित मूल्य और रोजगार के नए अवसर मिल सकते थे। ठाकुरगंज के किसान नई-नई फसलों के प्रयोग के लिए भी जाने जाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व यह क्षेत्र केला की खेती के लिए पहचाना जाता था, लेकिन उचित मंडी और मूल्य के अभाव में किसानों ने इससे दूरी बना ली। इसके बाद किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाई और इसमें भी सफलता हासिल कर बिहार ही नहीं, बल्कि देश स्तर पर अपनी पहचान बनाई। बावजूद इसके, अनानास की खेती यहां पीढ़ियों से होती आ रही है और आज भी जारी है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार द्वारा अनानास के लिए स्थानीय मंडी, न्यूनतम समर्थन मूल्य अथवा फूड प्रोसेसिंग प्लांट जैसी ठोस व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले समय में वे इस पारंपरिक और लाभकारी खेती से भी मुंह मोड़ने को मजबूर हो सकते हैं। इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि क्षेत्र की पहचान और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचेगा। इस संबंध में प्रखंड कृषि समन्वयक धर्मवीर कुमार ने बताया कि पहले इस क्षेत्र में केला की खेती बृहद पैमाने पर की जाती थी। लेकिन अब यह काफी सिमट गई है। वहीं उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में 2019 से पूर्व लगभग 10,000 हेक्टेयर में अनानास की भी खेती की जाती थी। जो अब घटकर लगभग 5000 हेक्टेयर अनानास की खेती किसानों द्वारा की जाती है। हालांकि अब अनानास की खेती में काफी सुधार हो रहा है। इस संबंध में ठाकुरगंज विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने बताया कि उनके द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ठाकुरगंज को पाइनएप्पल सिटी आफ बिहार के रूप में विकसित किए जाने के लिए पत्र लिखा गया है। मुख्यमंत्री को दिए गए पत्र में उन्होंने स्थानीय स्तर पर अनानास मंडी कोल्ड स्टोरेज फूड प्रोसेसिंग यूनिट पैकेजिंग केंद्र तथा मूल्य संवर्धन की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के मंडी पर निर्भर रहना पड़ता है।

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