Kishanganj News: किशनगंज में जरूरत के मुताबिक मिल रही बिजली
Kishanganj News: किशनगंज में जरूरत के मुताबिक मिल रही बिजली किशनगंज में जरूरत के मुताबिक मिल रही बिजली किशनगंज में जरूरत के मुताबिक मिल रही बिजली

Kishanganj News: किशनगंज। संवाददाता किशनगंज जिले में बिजली उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त बिजली मिल रही है। इसके बावजूद कभी-कभार होने वाली बिजली कटौती का मुख्य कारण कुछ तकनीकी खराबी को बताया जा रहा है। बिजली विभाग के अनुसार, जिले के अधिकांश प्रखंडों में रोजाना 22 घंटे से अधिक बिजली की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन मौसम और तकनीकी दिक्कतों की वजह से कभी-कभी आपूर्ति बाधित हो जाती है। बताया जाता है की आंधी और भारी बारिश के कारण हाई-वोल्टेज तारों और पोल आदि पर पेड़ या उनकी टहनियां गिर जाती हैं। इससे कई बार 33 केवी का इंसुलेटर पंचर हो जाता है, जिसे ठीक कर सिस्टम को दोबारा रिस्टार्ट करने में अधिक समय लग जाता है। तारों पर गिरे पेड़ों को हटाने के लिए विभाग अपने कर्मियों को लगाता है। लेकिन कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं जहाँ बिजली विभाग के लिए पेड़ हटाना संभव नहीं होता, तब वन विभाग की मदद ली जाती है। वन विभाग अपने स्तर से पेड़ों को हटवाने और टहनियों की छंटनी का काम करता है, जिसमें कई बार वक्त लग जाता है और उपभोक्ताओं को लंबे कट का सामना करना पड़ता है।
उपकरणों की है उपलब्धता
विभाग ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनके पास आवश्यक मेंटेनेंस सामग्री का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि, अगर कहीं कोई बड़ा उपकरण बदलना हो, तो कभी-कभार बजट (अलॉटमेंट) प्रक्रिया के कारण मामूली देरी हो जाती है।
अधिकारी का बयान
विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता विशाल चौधरी ने बताया कि जिले को आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त बिजली मिल रही है। आंधी-पानी और इंसुलेटर पंचर जैसी कुछ तकनीकी वजहों से ही बिजली कटती है। लेकिन हमारी टीम मुस्तैद रहती है और विभाग बिजली कटौती की समस्या को जल्द से जल्द दूर करने का हर संभव प्रयास करता है।
किशनगंज
रात में घंटों बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी, स्थायी समाधान की मांग
भीषण गर्मी के बीच कभी 33 केवी लाइन में खराबी, कभी 11 केवी फीडर ट्रिप तो कभी ओवरलोड की समस्या के कारण कई इलाकों में 7 से 8 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रहती है
बिजली विभाग के इसी लचर व्यवस्था को लेकर सप्ताह भर पहले प्रखंड के कुछ युवा आमरण अनशन पर भी बैठे थे
दिघलबैंक। एक संवाददाता
दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र में बारिश और गर्मी के मौसम में रात के समय लगातार घंटों बिजली बाधित रहने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। भीषण गर्मी के बीच कभी 33 केवी लाइन में खराबी, कभी 11 केवी फीडर ट्रिप तो कभी ओवरलोड की समस्या के कारण कई इलाकों में 7 से 8 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रहती है। बिजली विभाग की ओर से जारी सूचनाओं में बहादुरगंज की 33 केवी लाइन में तकनीकी खराबी, खराब मौसम, ओवरलोड तथा एचटी लाइन पर पेड़ गिरने जैसी वजहों से आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी दी जाती रहती है और ऐस समय में विभाग का यह कहना रहता है कि खराबी दूर कर आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन रोज रोज इसी तरह कि परेशानियों को झेलते झेलते प्रखंड क्षेत्र के लोग परेशान हैं। बिजली विभाग के इसी लचर व्यवस्था को लेकर सप्ताह भर पहले प्रखंड के कुछ युवा आमरण अनशन पर भी बैठे थे और उन युवाओं को बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने तथा वैकल्पिक व्यवस्थाओं से बिजली बहाल रखने का आश्वासन भी मिला था। लेकिन वर्तमान में हालात जस के तस बने हुए हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए फीडरों का पुनर्गठन किया गया था, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उपभोक्ताओं को आज भी लगातार रात में लंबी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि खराबी दूर करने में घंटों लग जाते हैं, जिससे भीषण गर्मी में रातबھر परेशानी झेलनी पड़ती है। उपभोक्ताओं ने विभाग से रात्रिकालीन बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने और तकनीकी खराबियों का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
पावर हाउस से फीडर की अधिक दूरी, बनती है परेशानी की सबब
पोठिया में फिलहाल 20 घंटा से अधिक बिजली आपूर्ति
पोठिया। निज संवाददाता
पोठिया प्रखंड के अंतर्गत तीन पावर हाउस है। पोठिया छतरगाछ तथा फाला। तीनों ही विद्युत केंद्रों के उपभोक्ताओं को 22 से 23 घंटे तक विद्युत आपूर्ति कराई जा रही है। लेकिन विशेष परिस्थिति में यदि आंधी-तूफान, वज्रपात आदि से तकनीकी समस्या में बिजली बाधित होने पर उपभोक्ताओं को कई कई घंटों तक बिजली की सुविधा से दो चार होना पड़ता है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इसमें विभागीय स्तर से कई दिक्कते है। जिसमें सबसे बड़ी वजह पावर हाउस से फीडरों की अधिक दूरी होना, मानव वालों की अपर्याप्त संख्या, तथा प्राकृतिक आपदा जैसे समस्याएं है। बताते चले की पोठिया के तहत संचालित तीन पवार हाउस से 14 फीडरों में विद्युत आपूर्ति कराई जाती है। जिसमें 32 मानव बल कार्यरत है। जिसके तहत छतरगाछ में 5 फीडरों में 9 मानव बल फाला में चार फीडरों में आठ मानव बल तथा पोठिया पावर हाउस में पांच फीडरों में 15 मानव बल कार्यरत है। फाला के विद्युत कनीय अभियंता राज कुमार, छतरगाछ से रूबी रंजन तथा पोठिया से कनीय अभियंता प्रमोद कुमार ने संयुक्त रूप से बताया अलग अलग संचालित तीनों फीडरों में 22 से 23 घंटे तक विद्युत आपूर्ति कराई जा रही है। सबसे बड़ी परेशानी संचालित केंद्रों से फीडरों की अत्यधिक दूरी ही आपदा या तकनीकी खराबी के कारण बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को बहाल कराने में देरी का वज़ह है। रूबी रंजन तथा प्रमोद कुमार कनीय अभियंता के मुताबिक पोठिया पावर हाउस से पश्चिम बंगाल सीमा स्थित धनतोला जो तकरीबन तीस-चालीस किमी की दूरी तक विद्युत आपूर्ति कराई जाती है। इस प्रकार छतरगाछ से महानंदा नदी के दूसरे दियारे काशीबाड़ी,बेंगदोगरा के तीन वार्डो तक बिजली आपूर्ति कराई जाती है। जिसकी दूरी 40 से 50 किमी की है। इन्हीं तमाम कारणों से आपदा या अन्य तकनीकी कारणों से बाधित हुई विद्युत आपूर्ति को बहाल करने में कभी-कभी विलंब हो जाता है। समाचार संकलन तक विद्युत आपूर्ति सामान्य रूप से रही।


