अब तक हजारों संदिग्ध लोगों की जांच में 906 नए मरीज चिह्नित

हिन्दुस्तान, किशनगंज
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अधूरा इलाज बना रहा एमडीआर टीबी का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को किया सतर्क अधूरा इलाज बना रहा एमडीआर टीबी का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को किय

अब तक हजारों संदिग्ध लोगों की जांच में 906 नए मरीज चिह्नित

किशनगंज। टीबी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि ऐसी संक्रामक चुनौती है जिसे नजरअंदाज करना पूरे परिवार और समाज पर भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच नहीं कराने और बीच में दवा छोड़ देने की आदत टीबी को और अधिक खतरनाक बना रही है। यही लापरवाही आगे चलकर एमडीआर टीबी जैसी गंभीर स्थिति में बदल जाती है, जिसका इलाज लंबा, कठिन और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है।

टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान

इसी खतरे को देखते हुए जिले में टीबी के खिलाफ चल रहा अभियान अब केवल मरीज खोजने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों को यह समझाने पर भी जोर दिया जा रहा है कि अधूरा इलाज पूरे समाज के लिए खतरा बन सकता है। गांवों से लेकर शहरी बस्तियों तक स्वास्थ्यकर्मी लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, कमजोरी, रात में पसीना आना या तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराना जरूरी है।

टीबी मरीजों की पहचान

जिले में 01 जनवरी 2026 से अब तक कुल 906 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इनमें सर्वाधिक 620 मरीज किशनगंज शहरी क्षेत्र से मिले हैं। इसके अलावा पोठिया में 91, दिघलबैंक में 36, बहादुरगंज में 26, कोचाधामन में 30, ठाकुरगंज में 14 तथा टेढ़ागाछ में 11 मरीज पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे 100 डेज़ टीबी अभियान के अंतर्गत अब तक 17,920 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिसमें 333 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है। वहीं जिले में कुल 24,130 लोगों की जांच की जा चुकी है।

स्वास्थ्य विभाग की पहल

स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान, बलगम जांच, एक्स-रे और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दे रही हैं। विभाग का कहना है कि इस अभियान के कारण पहले छूटे हुए मरीज भी अब सामने आ रहे हैं और समय पर इलाज से जुड़ रहे हैं। जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन मरीजों को दवा नियमित और पूरा लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई लोग थोड़ा ठीक महसूस होने पर दवा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले लेती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है।

टीबी की जांच की सुविधा

उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, कमजोरी या वजन कम होने जैसी समस्या हो तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर पहचान ही टीबी को गंभीर होने से रोक सकती है। टीबी मरीजों की जल्द पहचान सुनिश्चित करने के लिए जिले में पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन की सहायता से गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में भी जांच सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंप लगाकर मौके पर ही स्क्रीनिंग कर रही हैं। इस पहल से ऐसे लोगों को भी लाभ मिल रहा है जो अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते। विभाग का मानना है कि शुरुआती अवस्था में बीमारी पकड़ में आने से मरीज जल्द ठीक हो सकते हैं और संक्रमण का खतरा भी कम होता है।

निक्षय पोषण योजना

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी के इलाज में दवा के साथ पौष्टिक आहार भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों के बैंक खातों में प्रतिमाह सहायता राशि भेजी जा रही है। इसके अलावा निक्षय मित्रों के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को पोषण पोटली भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि इलाज के दौरान उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकें।

एमडीआर टीबी के मामले

जिले में एमडीआर टीबी के कुल 12 मरीज भी सामने आए हैं। इनमें किशनगंज शहरी क्षेत्र से 4 मरीज, दिघलबैंक से 2, बहादुरगंज से 1, कोचाधामन से 3, ठाकुरगंज से 2 तथा टेढ़ागाछ से 2 मरीज शामिल हैं। माता गुजरी मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट के विभागाध्यक्ष व विशेषज्ञ डाक्टर डॉ. शिव कुमार ने बताया कि एमडीआर टीबी मुख्यत: तब विकसित होती है जब मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं या नियमित उपचार नहीं लेते। ऐसे मरीजों के लिए विशेष दवाओं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। विभाग द्वारा सभी एमडीआर मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

टीबी को हराने की अपील

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी अब भी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर जांच और पूरा इलाज लेकर इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीमारी छिपाने या बीच में दवा छोड़ने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाकर जांच कराएं और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार पूरा इलाज लें। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की नि:शुल्क जांच, दवा, एक्स-रे एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है, ताकि कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रहे।

टीबी से संबंधित सामान्य प्रश्न

टीबी के लक्षण क्या हैं?
दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, कमजोरी, रात में पसीना आना या तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण टीबी के हो सकते हैं।
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