
सदर अस्पताल किशनगंज में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, गरीब मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा
महीने में तीन दिन बमुश्किल से गर्भवती महिलाओं का हो पाता है अल्ट्रासाउंड सदर अस्पताल किशनगंज में अल्ट्रासाउंड ठप, गरीब मरीजों कोसदर अस्पताल किशनगंज मे
किशनगंज सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रहने से आम मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में मशीन और आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध होने के बावजूद पिछले तीन माह से नियमित अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि रेडियोलॉजिस्ट का पदस्थापन होने के बावजूद अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा सामान्य मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मजबूरन निजी अल्ट्रासोनोग्राफी सेंटरों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जहां उन्हें महंगे दाम पर जांच करानी पड़ती है। सदर अस्पताल में पैथोलॉजी लैब, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन, डायलिसिस और आरटी-पीसीआर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने से अस्पताल में इलाज करवाने आने वाले कई मरीज बीच रास्ते में ही फंस जाते हैं।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच के लिए अल्ट्रासाउंड करवाना आवश्यक होता है, लेकिन सदर अस्पताल में उन्हें यह सुविधा केवल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत महीने में तीन दिन 9, 15 और 21 तारीख को ही मिल पाती है। इतना ही नहीं, कई बार इन निर्धारित तारीखों पर भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, राज्य स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शबनम यास्मीन को अल्ट्रासाउंड का प्रशिक्षण दिया गया है। वर्तमान में वही ड्यूटी रोस्टर के अनुसार गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर रही हैं। हालांकि, डॉ. यास्मीन को ओपीडी, लेबर रूम और सीजर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का भी सामना करना पड़ता है, जिसके कारण कई दिनों में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता। स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप रहने से सरकारी अस्पताल पर उनका भरोसा कमजोर हो रहा है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांच बाहर निजी सेंटरों से करानी पड़ रही है, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। अस्पताल में नियमित अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू न होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। लोगों का कहना है कि अगर सभी मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू कर दी जाए तो सदर अस्पताल वास्तव में जिले के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। फिलहाल मरीजों को उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द कार्रवाई कर रेडियोलॉजिस्ट की समस्या का समाधान करेगा और अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा सामान्य रूप से शुरू की जाएगी। अल्ट्रासाउंड बंद होने से सदर अस्पताल की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल किशनगंज सदर अस्पताल इन दिनों अल्ट्रासाउंड सेवा ठप होने के कारण सुर्खियों में है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड न होने से उपचार की प्रक्रिया बीच में ही रुक जाती है। जिला मुख्यालय का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होते हुए भी यहां जांच की यह मूलभूत सुविधा उपलब्ध न होना मरीजों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गया है। कई लोग दूर-दराज के गांवों से उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन जांच न होने पर उन्हें निजी संस्थानों का रुख करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने का मुख्य कारण रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति बताई जा रही है। अस्पताल में करीब तीन माह पहले रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती हुई थी, लेकिन योगदान देने के तुरंत बाद वे छुट्टी पर चले गए और तब से वापस नहीं लौटे। इस स्थिति में अस्पताल में कोई विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है, जो नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड कर सके। प्रशासन का दावा है कि संबंधित मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है, लेकिन विभागीय कार्रवाई का इंतजार जारी है। परिणामस्वरूप मरीजों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिल पा रही है। सदर अस्पताल में इस समय डॉ. शबनम यास्मीन को अल्ट्रासाउंड का प्रशिक्षण मिलने के बाद जिम्मेदारी दी गई है। वे अपनी क्षमता भर कोशिश करती हैं, लेकिन एक ही डॉक्टर पर ओपीडी से लेकर लेबर रूम और ऑपरेशन तक की कई जिम्मेदारियां होने के कारण नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड करना संभव नहीं हो पाता। अस्पताल में स्टाफ और विशेषज्ञों की कमी का दुष्प्रभाव सीधे मरीजों पर पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की बात करती है, तो सदर अस्पताल जैसे प्रमुख केंद्रों में इस तरह की स्थिति शर्मनाक है। अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद उसका उपयोग न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है। कई मरीजों ने बताया कि दवा लेने के बाद भी डॉक्टर उन्हें बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं। इससे गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले मरीज काफी परेशान हैं। लोगों की मांग है कि सदर अस्पताल में तत्काल स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए और अल्ट्रासाउंड सेवा को रोजाना उपलब्ध कराया जाए। इससे न केवल अस्पताल पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि मरीजों को समय पर सही इलाज भी मिल सकेगा। ऐसे में अल्ट्रासाउंड जैसी अनिवार्य जांच किसी भी अस्पताल के लिए बुनियादी आवश्यकता है और इसे लंबे समय तक बंद रखना मरीजों के जेब पर बोझ पड़ रहा है। अब इंतजार है उस दिन का जब सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा फिर से सुचारू रूप से चालू होगी और गरीब मरीजों को निजी सेंटरों की महंगी जांचों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बोले जिम्मेदार करीब तीन माह पूर्व सदर अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट की पदस्थापना हुई थी, लेकिन पदस्थापित डॉक्टर योगदान देने के बाद छुट्टी पर चले गए और अब तक वापस नहीं आए हैं। उनके गायब रहने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है। रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बाधित है और आवश्यकता के अनुरूप जांच उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।- डॉ. अनवर हुसैन, सदर अस्पताल उपाधीक्षक इनकी भी सुनिए सदर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं रहने के कारण अल्ट्रासाउंड की सुविधा ठप है, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए गरीबों को पैसे खर्च कर निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है, आरज़ू महिला मरीजों को अल्ट्रासाउंड सुविधा न मिलने से भारी दिक्कत होती है। गरीब मरीज अस्पताल में इलाज करवाने के बावजूद बाहर पैसे खर्च कर जांच करवाने को मजबूर हैं। इशरत अस्पताल में अल्ट्रासाउंड न होने से निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में महंगे दाम पर जांच करानी पड़ती है। आम मरीजों पर यह अतिरिक्त बोझ बहुत भारी पड़ता है। असलम रेज़ा गर्भवती महिलाओं को नियमित अल्ट्रासाउंड सेवा न मिलने से हर महीने भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर जांच न होने से जोखिम भी बढ़ जाता है। रूसी खातून अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा केवल पीएमएसएमए दिवस पर ही मिलती है और वह भी महीने में सिर्फ तीन दिन। यह सुविधा बहुत कम है। अय्यूब हुसैन पीएमएसएमए के दिन भी कई बार अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता। इस महीने की 9 तारीख को भी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। खुशनुमा परवीन अस्पताल में कब से सभी मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू होगी, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। मरीज अनिश्चितता में हैं। विष्णु कुमार मेरे घर से एक मरीज पेट दर्द की शिकायत लेकर सदर अस्पताल आया था। डॉक्टरों ने दवा देकर बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाने को कहा। गरीब मरीजों के लिए यह व्यवस्था ठीक नहीं है। मो. मतीन रेडियोलॉजिस्ट पदस्थापित होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू न होना स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति दर्शाता है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। शाहनवाज सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के बाद भी बाहर जाकर महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। गरीबों के लिए यह बहुत कठिन स्थिति है। शादिक आलम जरूरत पड़ने पर मरीजों को निजी अल्ट्रासोनोग्राफी से जांच करानी पड़ती है, जिससे गरीब मरीजों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। सनवर आलम अगर सदर अस्पताल में सभी मरीजों के लिए नियमित अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू हो जाए तो यह गरीब मरीजों के लिए बड़ा सहारा बन जाएगा। राशिद

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