
किशनगंज में महाभारतकालीन इतिहास को समेटे अवशेष विलुप्त होने के कगार पर
किशनगंज में महाभारतकालीन इतिहास को समेटे अवशेष विलुप्त होने के कगार पर किशनगंज में महाभारतकालीन इतिहास को समेटे अवशेष विलुप्त होने के कगार पर
किशनगंज। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि बिहार का चेरापूंजी कहा जानेवाला किशनगंज में महाभारत काल से जुड़े कई अवशेष हैं जो विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। इन अवशेषों को बचाने का प्रयास कागजों तक ही सिमट कर रह गया है। इसी अवशेष में शामिल टेढ़ागाछ प्रखंड का वेणुगढ़ टीला सीएम नीतीश कुमार की घोषणा पांच साल बाद भी आज तक पर्यटन के मानचित्र तक नहीं पहुंच सका है। वर्ष 2019 के नवंबर माह में किशनगंज पहुंचे सीएम नीतीश कुमार विशेषकर टेढ़ागाछ प्रखंड में महाभारतकाल से जुड़े वेणुगढ़ टीला का ही अवलोकन करने पहुंचे थे। यहां पुरातत्व विभाग से उन्होंने खुदाई भी करवायी थी। वेणुगढ़ में खुदाई के दौरान मिले ईंट व शिला को भी देखा था। यहां करीब पौने दो घंटे सीएम रुके थे। इस दौरान बाबा वेणु महाराज के मंदिर में पूजा-अर्चना भी किए थे। उन्होंने वेणुगढ़ मंदिर के बने डिजाइन का भी अवलोकन किया था। तब उन्होंने वहां मौजूद युवा एवं कला संस्कृति विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव रवि मनु भाई परमार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के विजय कुमार को वेणुगढ़ टीला का अनुसंधान एवं पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने का निर्देश दिया था। लेकिन आज हालात है कि वेणुगढ़ जहां खुदाई हुई थी वहां गड्डे में पानी भरे हैं। जिस तालाब को लाखों खर्च कर जलजीवन हरियाली योजना से विकसित किया गया था वो भी देखरेख के अभाव में अंतिम सांसे गिन रहा है। इसके चारों ओर हरे-भरे पौधे व बैठने के लिए बेंच बनाए गए थे। सब जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। वेणुगढ़ महाराज का मंदिर भी भव्य रुप नहीं ले सका है। बताते चलें कि जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर टेढ़ागाछ प्रखंड स्थित नेपाल की तराई में राजा वेणु से जुड़ा 180 एकड़ का वेणुगढ़ है। बताया जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां गुप्तवास किया था। आज भी यहां की ईटें व गढ़ के भग्नावशेष लोगों के लिए आस्था के केंद्र हैं। मान्यता है कि अदृश्य आत्माएं गढ़ की रखवाली करती हैं। गढ़ के पूरब दिशा में विशाल तालाब की मौजूदगी इसका आभास कराती है। यहां के लोग वेणुराजा को ग्रामीण देवता के रूप में सदियों से मान्यता देते आए हैं। प्रत्येक वर्ष वैशाखी पर राजा वेणु के मंदिर एवं गढ़ में विराट मेला का आयोजन होता है।

बौद्ध व पालकालीन अवशेष भी हैं उपेक्षित
बौद्ध काल में भी इस स्थान का विशेष महत्व था। इतिहासकारों की मानें तो किशनगंज का संबंध महाभारत काल के अलावा बौद्ध व पाल काल से रहा है। सूर्यवंशियों का शासन होने के कारण इस इलाके को सूरजापुर भी कहा जाता है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं है। विडंबना यह है कि यहां पर्यटन को बढ़ावा देने या अवशेषों के संरक्षण के लिए सरकार की ओर से की गयी पहल रंग नहीं ला पाई है। नतीजतन इतिहास को समेटे कई अवशेष विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।
जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में भी महाभारत काल से जुड़े कई अवशेष हैं। इनमें ठाकुरगंज का भातडाला पोखर, कीचक वध स्थल व भीम तकिया स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। वहीं कोचाधामन प्रखंड में भगवान सूर्य की पालकालीन प्रतिमा है। यह लोगों की आस्था से जुड़ा है।
पांडवों के अज्ञातवास के रुप में जाना जाता है ठाकुरगंज
ठाकुरगंज को मुख्य रूप से लोग पांडवों के अज्ञातवास स्थल के रूप में भी जानते हैं। मान्यता है कि पांडवों के अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहां बिताया था। महाभारत काल के कई धरोहर इस इलाके में हैं। इनमें से एक जगह भीमतकिया भी है। इस तकियानुमा गोल टीले के बारे में लोग बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इसी टीले पर सिर रखकर सोते थे। यहीं के भातडाला पोखर में पांडव स्नान करते थे और पास ही वे भोजन भी बनाते थे। पटेसरी पंचायत के दूधमंजर स्थित खीर समुद्र के बारे में मान्यता है कि यहां अर्जुन ने अपने तीर से खीर की नदी बनाई थी। बंदरझूला पंचायत अंतर्गत कन्हैया जी टापू पर भी पांडवों ने अज्ञातवास का कुछ समय बिताया था। यहीं पास के नेपाल में कीचक वध स्थल है। यहां भीम ने कीचक का वध किया था।
कोचाधामन में सूर्य की है पालकालीन प्रतिमा :
कोचाधामन प्रखंड के बड़ीजान गांव स्थित सूर्य की प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र हैं। करीब 57 साल पूर्व 1961 में गांव में खुदाई के दौरान मिली भगवान सूर्य की आदमकद प्रतिमा और कई अवशेषों को जानकार पालकालीन बता रहे हैं। ग्रामीण इस प्रतिमा को पीपल के वृक्ष के नीचे रखकर इसकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। सात घोडों पर सवार भगवान सूर्य की इस आदमकद प्रतिमा में काफी चमक है। माना जाता है कि यह प्रतिमा आठवीं शताब्दी के पाल वंश काल की है। इसकी पुष्टि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा वर्ष 2002-03 में की गई थी।

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