
किशनगंज में कई सरकारी विभागों में लहलहा रही भ्रष्टाचार की फसल, आम जनता परेशान
शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से जिले में बढ़ रहा भ्रष्टाचार का भयावह फैलाव, कई विभागों में रिश्वतखोरी पर हाकिम नहीं दे रहे ध्यान
किशनगंज, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। जिले के कई सरकारी विभागों भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी की फसल लहलहा रही है। इधर, आम जनता बेहाल व परेशान है। जनता का आरोप है कि बिना घूस दिए सरकारी योजना का लाभ लेना या सरकारी कार्यालयों में काम करवाना मुश्किल हो गया है। बीते दिनों ठाकुरगंज सीओ के निलंबन, भू-अर्जन मुआवजा में घूस लेते कर्मी की निगरानी द्वारा गिरफ्तारी, और हाल ही में जमीन परिमार्जन के नाम पर ढाई लाख रुपये रिश्वत लेते राजस्व कर्मी की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं ने जिले में फैले भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। आम लोगों का कहना है कि इन मामलों की शिकायत पहले जिला मुख्यालय तक पहुंचाई गई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने से उन्हें निगरानी विभाग की शरण लेनी पड़ी।

इन मामलों की शिकायत जिला में बैठे हाकिम से पहले कई बार की गयी थी लेकिन ठोस एक्शन नहीं होने के कारण पीड़ित आम जनता को निगरानी का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होना पड़ा। आलम यह है कि चाहे सीओ कार्यालय में जमीन संबंधी काम करवाना हो या फिर पीएम आवास योजना के तहत घर लेना हो या मनरेगा में काम की मजदूरी या फिर भू-अर्जन में गयी जमीन का मुआवजा से लेकर या अन्य कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेना हो, किशनगंज में कई सरकारी कार्यालयों में पग पग पर फैले भ्रष्टाचार ने आम जनता को बेहाल व परेशान कर दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि किशनगंज के कई विभागों में घूसखोरी व भ्ष्र्टाचार रोकने की जवाबदेही व जिम्मेदारी से जिला स्तर के अधिकारी क्यों मुंह फेर रहे हैं? आखिर आम जनता के फरियादों और शिकायतों पर जिला प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाने से क्यों हिचकते हैं? ऐसे आधा दर्जन उदाहरण हाल के दिनों के हैं, जिसमें शिकायतों के बाद भी जिला मुख्यालय में बैठे अधिकारियों ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, आम जनता बेहाल ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर जिला स्तर के अधिकारी शिकायतें मिलने के बावजूद समय रहते कदम क्यों नहीं उठाते? हाल के दिनों में ऐसे आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आए, जिनमें शिकायत दर्ज कराने के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। इन सवालों पर डीएम विशाल राज का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। लेकिन शिकायतकर्ताओं का पक्ष इससे उलट है। सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी और अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ लगातार मुखर रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता आबिद हुसैन उर्फ फूलबाबू का कहना है कि उनके पास एक दर्जन से अधिक मामलों से जुड़े पुख्ता कागजात मौजूद हैं, पर जिला स्तर पर इन्हें दबा दिया गया। वहीं, जिले के सत्ता पक्ष के एकमात्र जदयू विधायक गोपाल अग्रवाल का कहना है कि बिहार में भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीरो टोलरेंस नीति लागू है। गड़बड़ी करने वाले किसी भी हाल में बच नहीं पाएंगे। बहरहाल, इन दावे प्रतिदावे के बीच आम जनता आज भी कई सरकारी विभागों व योजेनाओं में रिश्वतखोरी के काले कारोबार से रोज जूझ रही है।

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