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जिउतिया व्रत आज, निर्जला उपसवास रखेंगी व्रती महिलाएं

जिउतिया व्रत आज, निर्जला उपसवास रखेंगी व्रती महिलाएं

संक्षेप:

अपने संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं रखती हैं जिउतिया व्रत सोमवार को पारण

Sun, 14 Sep 2025 02:49 AMNewswrap हिन्दुस्तान, किशनगंज
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अपने संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं रखती हैं जिउतिया व्रत सोमवार को पारण के साथ व्रत होगा पूरा दिघलबैंक। निज संवाददाता नहाय खाय के साथ तीन दिवसीय जिमुतवाहन(जिउतिया) पर्व शनिवार से शुरू हो गया। अपने संतान की दीर्घायु के लिए मनाये जाने वाला जीवित पुत्रिका पर्व को लेकर शनिवार को सप्तमी को नहाय खाय के बाद रविवार अष्टमी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी और नवमी सोमवार को पारण के साथ व्रत संपन्न हो जाएगा। शनिवार को दिघलबैंक प्रखंड के अलग-अलग हिस्सों में जिउतिया व्रत के पहले दिन को नहाई खाई के साथ-साथ दिन भर महिलाएं रविवार को होने वाले जीमूतवाहन के पूजा के लिए सामग्रियों इकट्ठा करने में लगी रहीं।

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जिउतिया व्रत में नहाय खाय का विशेष महत्व होता है। महिलाएं इस दिन सुबह कई तरह के पारंपरिक वस्तुओं जैसे बांस तथा जीया के पत्ते पर बैठकर स्नान करती हैं और स्नान के दौरान खल्ली को व्यवहार में लाती हैं। व्रती महिलाएं नहाय खाय के दिन सिर्फ एक बार ही सात्विक भोजन करते हैं। जबकि मैथिल परंपरा को मानने वाले लोग नहाय खाय के दिन मछली भात का सेवन करती हैं और उसके बाद रात को छत पर या घर के पीछे जाकर चारों दिशाओं में कुछ खाना रख दिया जाता है। वहीं पूजन के लिए जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित किया जाता है और फिर पूजा करती है। इसके साथ ही मिट्टी तथा गाय के गोबर से चील व सियारिन की प्रतिमा बनाई जाती है। जिसके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है। पूजन समाप्त होने के बाद जिउतिया व्रत की कथा सुनी जाती है। पुत्र की लंबी आयु, आरोग्य तथा कल्याण की कामना से ्त्रिरयां इस व्रत को करती है। कहते हैं जो महिलाएं पुरे विधि-विधान से निष्ठापूर्वक कथा सुनकर पंडित को दान-दक्षिणा देती है, उन्हें पुत्र सुख व उनकी समृद्धि प्राप्त होती है। इस पर्व में ओठगन का भी विशेष महत्व है, जिसमें महिलाएं अपने बच्चों को सप्तमी के अर्ध रात्रि के बाद स्वयं सहित बच्चों को कुछ न कुछ खिलाती हैं और उसके बाद निर्जला व्रत शुरु करती हैं एवं नवमी को पारण करती हैं। पं. देव कांत झा 'बटुक' के अनुसार इस वर्ष पारण का समय सोमवार सुबह 6.36 के बाद है, जब महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत तोड़ती हैं।