सीमावर्ती इलाकों में हाथियों के उत्पात से किसान परेशान
सीमावर्ती इलाकों में हाथियों के उत्पात से किसान परेशान सीमावर्ती इलाकों में हाथियों के उत्पात से किसान परेशान सीमावर्ती इलाकों में हाथियों के उत्पात स

दिघलबैंक। एक संवाददाता नेपाल के जंगलों से निकलकर सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंच रहे हाथियों का उत्पात दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। इससे किसानों के साथ-साथ आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग रात-रात भर जागकर किसी तरह अपनी जान और फसल की रक्षा करने को मजबूर हैं।पिछले एक पखवाड़े से धनतोला पंचायत के बिहार टोला और मुलाबाड़ी गांव के आसपास मक्के के खेतों में हाथियों के अलग-अलग झुंड डेरा डाले हुए है। सोमवार की रात एक झुंड गांव की आबादी तक पहुंच गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। गांव की गलियों में हाथियों की आवाजाही से लोग भयभीत हो उठे।
हालांकि, ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए अलाव जलाकर और पटाखे फोड़कर किसी तरह हाथियों को गांव से दूर भगाया। राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन भय का माहौल बरकरार है। दिघलबैंक प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में जंगली हाथियों की समस्या कोई नई नहीं है। दशकों से यहां के किसान इस संकट का सामना करते आ रहे हैं, लेकिन इस वर्ष स्थिति और भी गंभीर हो गई है। बीते ढाई महीनों में हाथियों की झुंड एक दर्जन से अधिक बार नेपाल के जंगलों से निकलकर मैदानी इलाकों में प्रवेश कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर मक्के की फसल को रौंद डाला है और कई आवासीय घरों को भी नुकसान पहुंचाया है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस साल अब तक हाथियों ने करीब 50 एकड़ में लगी मक्के की फसल को बर्बाद कर दिया है, वहीं एक दर्जन से अधिक घरों को भी क्षति पहुंची है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत और आजीविका दोनों पर संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विभाग केवल तब सक्रिय होता है जब हाथी गांव में प्रवेश कर जाते हैं, जबकि नियमित निगरानी और ठोस कार्रवाई का अभाव बना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि समाधान नहीं मिलने पर वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।वहीं वनों के क्षेत्र पदाधिकारी राधेश्याम राय ने बताया कि करीब 15 हाथियों का झुंड अलग-अलग समूहों में बंट गया है, जिससे नुकसान की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि इस समय मक्के की फसल घनी और ऊंची हो चुकी है, जिससे खेतों में हाथियों को खदेड़ना मुश्किल हो रहा है। विभाग के पास तत्काल कोई विशेष संसाधन उपलब्ध नहीं है, ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और जागरूकता के जरिए नुकसान कम करने की सलाह दी जा रही है।
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