किशनगंज में अवैध बालू-मिट्टी खनन का खेल बेखौफ जारी, ठोस कार्रवाई का इंतजार

Apr 06, 2026 12:08 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, किशनगंज
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कार्रवाई के दो तीन दिनों बाद ही फिर से शुरू हो जाता है अवैध खनन का खेल, खनन विभाग की भूमिका पर उठे सवालकार्रवाई के दो तीन दिनों बाद ही फिर से शुरू हो

किशनगंज में अवैध बालू-मिट्टी खनन का खेल बेखौफ जारी, ठोस कार्रवाई का इंतजार

किशनगंज, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि किशनगंज जिले के विभिन्न प्रखंडों में इन दिनों अवैध बालू एवं मिट्टी खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। खासकर किशनगंज प्रखंड अंतर्गत महिंगाव, दौला और चकला पंचायत क्षेत्रों में महानंदा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफिया बिना किसी डर-भय के जेसीबी मशीनों के जरिए रात-दिन बालू निकालकर अन्य राज्यों तक सप्लाई कर रहे हैं, जबकि प्रशासन और खनन विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने के कारण स्थिति विकराल होती जा रही है। आलम यह है कि गाछपाड़ा में अवैध खनन के खिलाफ खनन विभाग ने कार्रवाई की थी लेकिन दो दिनों के बाद फिर से मौके पर अवैध खनन का खेल शुरू हो गया है।

स्थिति की विकरालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टेढ़ागाछ से लेकर ठाकुरगंज प्रखंड तक खनन माफिया को जहां मौका मिल रहा है, वे मिट्टी व बालू का अवैध खनन का गोरखधंधा कर मालामाल हो रहे हैं। इधर, जिला खनन पदाधिकारी प्रणव प्रभाकर ने कहा कि अवैध खनन की सूचना मिलने पर कार्रवाई में कोई देरी नहीं की जाती है। अवैध खनन करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा।महिनगांव पंचायत में नहीं रूका अवैध खनन तो बाढ़ का बढ़ेगा खतरामहिंगाव पंचायत के बांसबाड़ी, मरवाटोली, गोविंदपुर, नुनिया फरसदांगी और बेलवा जैसे क्षेत्रों में अवैध खनन लगातार जारी है। वहीं दौला पंचायत के फुलबाड़ी बसंतपुर, तालटोला, पोरलाबाड़ी और बलिया मंझोक सहित अन्य गांवों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। चकला पंचायत के बरारो घाट पर महानंदा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर बालू की अवैध निकासी हो रही है। इन सभी स्थानों पर हर वर्ष सरकार द्वारा बाढ़ नियंत्रण (फ्लड फाइटिंग) कार्य भी कराया जाता है, लेकिन अवैध खनन के कारण इन प्रयासों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इधर, स्थानीय निवासी अजहर अली ने जिला पदाधिकारी को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कुछ नामजद लोगों द्वारा संगठित तरीके से यह अवैध कारोबार चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर न सिर्फ गाली-गलौज की जाती है, बल्कि मारपीट और जान से मारने की धमकी भी दी जाती है। इससे साफ है कि खनन माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महानंदा नदी से लगातार बालू निकासी के कारण नदी का कटाव तेज हो गया है। इससे गांवों की जमीन और संपत्ति पर खतरा मंडराने लगा है। कई किसानों की उपजाऊ भूमि नदी में समा चुकी है, जबकि आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है।ठोस व सख्त कार्रवाई नहीं होने से अवैध खनन की स्थिति विकरालसबसे गंभीर सवाल खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग को इसकी पूरी जानकारी है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। यहां तक कि अवैध खनन करने वालों के पास न तो कोई वैध लाइसेंस है और न ही सरकार को रॉयल्टी दी जा रही है, जिससे राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, अवैध रूप से निकाले गए बालू को गांवों की सड़कों और घरों के पास जमा कर दिया जाता है, जिससे आम लोगों के आवागमन में भी भारी परेशानी हो रही है। कई जगहों पर सड़कें संकरी हो गई हैं और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। कुछ दिन पहले पोठिया प्रखंड में बालू लदे डंफर द्वारा बिजली पोल तोड़ दिया गया था, आये दिन दुर्घटना होते रहती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और इस पर तत्काल रोक लगाई जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या न सिर्फ पर्यावरण के लिए बल्कि ग्रामीणों के अस्तित्व के लिए भी गंभीर संकट बन सकती है।

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