हाथी ने तीन गांव में मकई व केला की फसल को किया बर्बाद
हाथी ने तीन गांव में मकई व केला की फसल को किया बर्बाद हाथी ने तीन गांव में मकई व केला की फसल को किया बर्बाद

दिघलबैंक। एक संवाददाता सीमावर्ती इलाकों में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार की रात नेपाल के जंगलों से आये सात हाथियों की झुंड ने दिघलबैंक प्रखंड के धनतोला पंचायत के गिरीटोला, मोहामारी जादूटोला और पास के बेरबन्ना गांव में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने खेतों में घुसकर मकई और केला की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया और पिछले कई घटनाओं की तरह सुबह होने से पहले वापस जंगल की ओर लौट गए। स्थानीय किसानों के अनुसार इस सीजन में हाथियों द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा नुकसान है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब सात की संख्या में गुरूवार मध्य रात के समय सीमावर्ती गांवों में घुसे हाथियों ने दो दर्जनों किसानों की पांच से छह एकड़ में लगी मकई की फसल को रौंद डाला।
कई जगहों पर खेत पूरी तरह नष्ट हो गया है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मोहामारी तेज नारायण टोला निवासी ठाकुर प्रसाद सिंह ने बताया कि हाथियों की झुंड ने उनके परिवार की करीब डेढ़ एकड़ में लगी मकई की पूरी फसल बर्बाद कर दी। पूरे साल की मेहनत एक रात में खत्म हो गई। वहीं कजला निवासी चन्द्र देव सिंह ने बताया कि गुरुवार की रात करीब दो बजे हाथियों ने उनके केला के बागान में डेरा जमा लिया। शुक्रवार की सुबह जब वे खेत पहुंचे तो केला के कई पौधे टूटे और उखड़े पड़े थे, जिससे उन्हें हजारों रुपये का नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि हर वर्ष कि तरह इस वर्ष भी हाथियों का आना लगातार जारी है। पिछले कुछ सप्ताह से भारत-नेपाल सीमा से सटे गांवों में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। जैसे-जैसे मक्के की फसल तैयार हो रही है, हाथियों का झुंड रात के अंधेरे में खेतों की ओर रुख कर रहा है। इससे पहले भी करूवामनी, पांचगाछी, बारहभांग सहित आसपास के गांवों में फसलों के साथ-साथ कच्चे घरों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। क्या कहते हैं रेंजर इस संबंध में जब रेंजर अंशुमन कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हाथियों का झुंड नेपाल के जंगल से आकर सीमावर्ती गांवों में प्रवेश कर रहा है। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रभावित गांवों में वनकर्मियों की टीम को अलर्ट पर रखा गया है। किसानों से अपील की गई है कि वे रात में अकेले खेतों की ओर न जाएं और समूह में रहकर सतर्कता बरतें। आगे उन्होंने कहा कि क्षति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है और नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग करते हुए कहा है कि सीमावर्ती इलाकों में फेंसिंग, वॉच टावर और रात्रि गश्ती की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की फसल और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। लगातार हो रहे नुकसान से किसानों में भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
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