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30 सितम्बर, 2020|5:35|IST

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चार साल में नहीं बन सका ट्रामा सेंटर

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खगड़िया जिले से गुजरने वाले एनएच पर प्रत्येक दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। लोग गंभीर रूप से जख्मी होते हैं, लेकिन जिले में समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार लोगों की जान भी चली जाती है।

इसका मुख्य कारण जिले में ट्रामा सेन्टर का नहीं होना बताया जा रहा है। क्योंकि गंभीर जख्मी मरीजों का यहां इलाज संभव नहीं हो पाता है। डॉक्टरों द्वारा उसे तुरंत रेफर कर दिया जाता है। वही रास्ते में अच्छे अस्पताल पहुंचने से पहले अधिक समय गजर जाने के कारण उसकी मौत हो जाती है। इस मौत के आंकड़ों को कम करने के लिए सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में ट्रामा सेंटर खोलने की जरूरत जतायी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा : हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ट्रामा सेन्टर खोलने की घोषणा 6 फरवरी 2015 को सौ शय्या सदर अस्पताल के उद्घाटन के दौरान की थी। लेकिन लगभग चार वर्ष के बाद भी ट्रामा सेन्टर नहीं खुल सका है। इसके लिए विभाग और उच्चाधिकारियों को बेहतर पहल करने की आवश्यकता है।

ट्रामा सेन्टर नहीं होने से क्या होती है परेशानी : डॉक्टरों की मानें तो बताते हैं कि सड़क दुर्घटना में कई बार लोगों को सिर में गंभीर चोटें आती हैं। ऐसे में जख्मी कभी-कभी बेहोश होकर कोमा में चले जाते हैं। इसके साथ ही सड़क दुर्घटना में सीना व अन्य संवेदनशील अंगों में गंभीर चोटें आती हैं। ऐसे में ट्रोमा सेन्टर में लगे वेन्टीलेटर, सेक्शन मशीन, कार्डिएट मॉनिटर समेत अन्य अत्याधुनिक संयंत्र ऐसे गंभीर मरीजों के समचित इलाज के दौरान कारगर साबित होता है।

गंभीर मरीजों को रेफर करना बनी है मजबूरी: सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से जख्मी मरीजों को सदर अस्पताल से रेफर करना डॉक्टरों की मजबूरी है। क्योंकि सदर अस्पताल में ऐसे गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन के अलावा अन्य सुविधाएं नहीं हैं। अगर ट्रोमा सेंटर की व्यवस्था हो तो प्रत्येक वर्ष दर्जनों लोगों की जानें बचायी जा सकती हैं। पूर्णिया व बेगूसराय के बीच में है खगड़िया : एनएच 31 की लंबी सड़क में पूर्णिया व बेगूसराय के बीच एकमात्र खगड़िया ही विकल्प के तौर पर ट्रोमा सेन्टर हो सकता है। क्योंकि जिले के अलावा अगर अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सड़क दुर्घटना पर उसका इलाज यहां हो सकता है। कई बार भेजा गया है प्रस्ताव : मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कई बार उच्चाधिकारियों को यह प्रस्ताव भेजा गया। लेकिन प्रस्ताव पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

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  • Web Title:Trauma center could not be established in four years