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शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्घ है बुढ़िया काली मां

शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्घ है बुढ़िया काली मां

प्रखंड के गोगरी पंचायत के ब्राह्मण टोला में अवस्थित बुढ़िया काली मंदिर शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्घ है। जहां भक्तों की हर मन्नतें पूरी होती है। बताया जाता है कि काली मां भक्तांे के हर संकट को दूर करती है। बुढ़िया काली मंदिर के पुजारी बिजय दुबे ने बताया कि इस बुढ़िया काली का इतिहास है कि गोगरी ब्राह्मन टोला के काली दुबे नामक व्यक्ति ने एक बार जंगल में शिकार खेलने गए हुए थे तो शिकार खेलने के समय उनके सामने दो बाघ और सिंह आ गए।

उस वक्त उनका जीवन संकट में पड़ गया। उस समय काली दुबे अपनी जान की रक्षा करने की सोचने लगा। संकट की घड़ी में मां काली प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर काली दुबे के जान की रक्षा बाघ व सिंह से की थी। जिसके बाद मां काली ने उन्हें अपने यहां स्थान देने की बात कही। इस पर काली दुबे ने हाथ जोड़कर कहा कि मां अगर पूजा अर्चना में किसी प्रकार की भूल या गलती हो जाएगी तो मैं गुनाहगार हो जाऊंगा। तब मां काली ने उनसे कहा कि तुम्हारा बंशज किसी प्रकार का भूल या गलती करेगा तो माफी माना जाएगा। यह कथा आज भी क्षेत्र में प्रचलित है।

बुढ़िया काली मंदिर में बलि देने की है परंम्परा: ब्राह्मन टोला गोगरी में बुढ़िया काली मंदिर में बलि चढ़ाने की पुरानी परंपरा है। पूजा की निशा रात्री को विधि विधान के साथ पाठा की बलि चढ़ाया जाता है। स्थानीय दीपक उपाध्याय ने बताया कि बुढ़िया काली क्षेत्र की सबसे बड़ी काली के रूप में विख्यात है। यहां मन्नते मांगने वालांे की हर मुरादे पूरी होती है। स्थानीय साहित्यकार डा. सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि बुढ़िया काली की महिमा अपरमपार है। यह मंदिर आस्था का केन्द्र बना है। बुढ़िया काली मां की पूजा अर्चना करने वाले भक्तों को सुख, शांति, समृद्घि के साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। जिसके कारण यहां पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्घालुओं की भीड़ काफी जुटती है।

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  • Web Title:The old kali maa is famous as Shakti Pith