एक वर्ष में नवनिर्मित पीसीसी सड़क टूटकर हुई बर्बाद

Jan 13, 2026 01:11 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, खगडि़या
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एक वर्ष में नवनिर्मित पीसीसी सड़क टूटकर हुई बर्बाद एक वर्ष में नवनिर्मित पीसीसी सड़क टूटकर हुई बर्बाद

एक वर्ष में नवनिर्मित पीसीसी सड़क टूटकर हुई बर्बाद

परबत्ता । एक प्रतिनिधि प्रखंड क्षेत्र के सियादतपुर अगुवानी पंचायत के राका गांव में 15वीं वित्त आयोग (टाइड) मद से बनायी गई पीसीसी सड़क व नाला निर्माण की गुणवत्ता की पोल खुल गई है। मात्र एक वर्ष के अंदर ही पीसीसी सड़क टूटकर बर्बाद हो गई है। सड़क के टूटते ही स्थानीय ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर अंगुली उठाना शुरू कर दिया है। आज उक्त सड़क की चर्चा पंचायत में जोर शोर से शुरू है, लेकिन विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रखंड के सियादतपुर अगुवानी पंचायत में 15वीं वित्त की करीब साढ़े आठ लाख की राशि से वार्ड नंबर 18 स्थित प्रभाकर झा के घर से बबलू सिंह के घर तक पीसीसी सड़क का निर्माण किया गया है।

वर्ष 2024 के अंत तक पूर्ण कर लिया गया, लेकिन बतौर एक वर्ष के अंदर ही सड़क टूटकर बर्बाद हो चुकी है। आज सड़क की स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि लगभग 30 फीट हिस्सा पूरी तरह टूट चुकी है। जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। यह योजना वर्ष 01/2024-25 की है। जिसकी प्राक्कलित राशि 8, 50,900 रुपये दर्ज है। इस योजना अंतर्गत सड़क व नाला निर्माण का प्रावधान है, लेकिन सड़क निर्माण की गुणवत्ता इतनी घाटिया है कि जहां तहां ध्वस्त हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मिट्टी भराई में मानकों की अनदेखी की गई और जल्दबाजी में पीसीसी डाल देने के कारण सड़क टिक नहीं सकी। जबकि नाला किनारों से टूटकर बेकार हो चुका है। अब स्थिति यह है कि दो हिस्सों में बंट चुकी। सड़क से आवागमन जोखिमपूर्ण हो गया है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के साथ कभी भी बड़ी घटना घट सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस योजना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद एक वर्ष भी सड़क नहीं टिक पाना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने टूटे हुए हिस्सों का शीघ्र पुनर्निर्माण करने तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है। बोले अधिकारी : इस योजना की जांच बाद अगर निर्माण कार्य में अनियमितता पायी गई तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। संतोष कुमार पंडित, बीडीओ, परबत्ता। फोटो : 26 कैप्शन: परबत्ता के खानुआ राका गांव में एक वर्ष में टूटी पीसीसी सड़क। 3. बोले: शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के आभाव में बेकार पड़ा हुआ है एनआईसीयू मामला सौ शय्या गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल का चाइल्ड डॉक्टर की कमी रहने से नवजात की होती है मौत अस्पताल में नही है गैनोलॉजिस्ट चिकित्सक पदस्थापित गोगरी, एक संवाददाता सौ शय्या अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी में एनआईसीयू (नवजात शिशु संरक्षण इकाई) बना हुआ है, लेकिन चाइल्ड विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में बेकार पड़ा हुआ है। विभागीय स्तर से अनुमंडलीय अस्पताल में पदस्थापित चाइल्ड विशेषज्ञ चिकित्सक को सदर अस्पताल में डिप्टेशन कर दिया गया है। वर्तमान में अनुमंडलीय अस्पताल में चाइल्ड विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। जिसके कारण अस्पताल में बने एनआईसीयू बेकार पड़ा हुआ है। अस्पताल में कई लोगो ने बताया कि प्रसव होने पर नवजात की हालत खराब होने पर डॉक्टर ने सलाह दी कि नवजात के मुंह मे गंदा पानी चला गया है। इसलिए नवजात को परेशानी हो रही है। उन्हें सदर अस्पताल ले जाने की सलाह दी, परंतु अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों एवं आशा कार्यकर्ता ने एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराने की बात कही। जहां चार हजार रुपए प्रतिदिन के दर से आर्थिक शोषण शुरू हो गया। इसके अलावा दवा व सूई के लिए अलग से रुपया खर्च करना पड़ा। बताया गया अगर अनुमंडलीय में एनआईसीयू चालू रहता तो निजी क्लिनिक या सदर अस्पताल जाने की नौबत नहीं आती। इस तरह की दो तीन समस्याएं अस्पताल में रोज दिन होती रहती है जिसे मजबूरन निजी क्लिनिक में ही नवजात को भर्ती कराना पड़ता है। गायनी विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में प्रसव पीड़िता को हो रही परेशानी: अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी में गायनी विशेषज्ञ डॉक्टर की पोस्टिंग नही रहने से प्रसव कराने आई महिला मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग पोस्टिंग नहीं कर रहे है। बताया गया कि अनुमंडलीय अस्पताल में प्रति दिन 30 से 40 महिला प्रसव कराने पहुंचती है। जिसमें गायनी स्पेशलिस्ट डॉक्टर नही रहने से लगभग आधा दर्जन प्रसव मरीजों को सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। रेफर होने की स्थिति में अस्पताल में घूम रहे बिचौलिए बहला फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में सुरक्षित प्रसव कराने का आश्वासन पर प्रसव मरीजों को ले जाकर आर्थिक शोषण करते हैं। अनुमंडलीय अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के नाम पर ड्यूटी कर रही एएनएम एवं जीएनएम भी मोटी राशि ठगने का काम करती है। उचित सलाह के अभाव में कई प्रसव मरीजों की हो चुकी हैं मौत : गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल में गायनी स्पेशलिस्ट नही रहने से कई बार प्रसव मरीजों की मौत हो चुकी हैं। बताया गया कि जब प्रसव के दौरान छोटी ऑपरेशन की जरूरत होती है तो उस स्थिति में मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। रेफर के बाद निजी क्लिनिक में बिचौलिए ले जाकर सिजेरियन ऑपरेशन कर प्रसव कराकर 50 से 60 हजार रुपए की वसूली करते हैं। शिकायत तो यह भी मिल रही है कि अगर एएनएम को नजराना देने में आनाकानी किए जाने पर डॉक्टर से कहकर रेफर करा दिया जाता है, ताकि परिजनों की मोटी खर्च हो सके। पुरुष डॉक्टर के भरोसे प्रसव कराने की मजबूरी: गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल में गायनी स्पेसलिस्ट डॉक्टर की पोस्टिंग नही रहने से पुरुष डॉक्टर से प्रसव कराया जाता है। बताया गया कि जब पुरुष डॉक्टर प्रसव महिला मरीजों की स्थिति देखते हंै तो उस समय प्रसव महिला शर्मिन्दित हो जाती है, लेकिन मजबूरन पुरुष डॉक्टर से प्रसव कराने को तैयार होती है। बोले अस्पताल प्रभारी: रेफ़रल अस्पताल में मुख्यालय से कई विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग की गई है। चाइल्ड एवं गायनी स्पेशलिस्ट की पोस्टिंग की गई थी। पर, वे अस्पताल में योगदान करने के साथ ही पीजी की पढ़ाई करने चले गए। डॉ चंद्रप्रकाश, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, गोगरी अनुमंडलीय अस्पताल।

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