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कोशी के जलस्तर में वृद्धि से सहमे लोग

कोशी के जलस्तर में वृद्धि से सहमे लोग

कोशी नदी की लगातार जलस्तर में वृद्घि होने से कई गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। जैसे-जैसे नदी के जलस्तर में वृद्घि हो रही है वैसे ही गांवों के लोगों के बीच दहशत का माहौल दिखने लगा है।

गोगरी प्रखंड के पौरा एवं बलतारा पंचायत के कई गांव ऐसे हैं जो कोशी नदी के किनारे बसा हुआ है। जहां के लोगों में बाढ़ का भय व्याप्त है। जानकारी के अनुसार पौरा पंचायत के प्रयागी, सहरौन, पौरा ओपी का क्षेत्र एवं बलतारा पंचायत के लौंगा एवं फुलबड़िया गांव कोसी नदी के किनारे पर बसा हुआ है। जहां के अधिकंाश लोग प्रत्येक दिन नाव की सवारी कर प्रखंड व जिला मुख्यालय तक आवाजाही करते हैं।

नदी के जलस्तर में वृद्घि होने से इन गांवों के लोगों के समक्ष बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

पुनर्वास नहीं किए जाने से कटाव पीड़ितांे को परेशानी: वर्षों पूर्व बलतारा एवं पौरा गांव में कटाव होने पर सहरौन, लौंगा एवं प्रयागी गांव के लोगों को जब सरकार द्वारा पुनर्वासित नहीं किया गया तब फिर कटाव पीड़ितों ने पहले कटे हुए स्थानों पर ही घर बनाकर जीवन गुजार रहे हैं। जिसका परिणाम है कि इस गांव की लगभग चार हजार आबादी को कोशी नदी नाव से पारकर आवाजाही करनी पड़ती है। जब कोसी नदी के जल स्तर में वृद्घि होती है तो लोगों में खतरा का भय सताने लगता है।

कटाव पीड़ितों को नहीं मिली सुविधा: कोशी कटाव से विस्थापित हुए हजारों परिवारों को पुनर्वासित नहीं किया जा सका है। साथ कटाव पीड़ितों को प्रशासनिक स्तर से कोई सुविधा भी मुहैया नहीं करायी गई। जिसका परिणाम है वे लोग कोसी नदी के तट पर दहशत के बीच जिन्दगी गुजार रहे हैं।

प्रयागी गांव के पंकज यादव, उदय यादव, सहरौन गांव के अखिलेश सिंह आदि ने बताया कि प्रशासनिक स्तर से कटाव पीड़ितों को पुनर्वासित किए जाने को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। नदी के जल स्तर बढ़ने से हर साल उनकी धड़कनें तेज हो जाती है।

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  • Web Title:People with a rise in Kosi water level