
पांच वर्ष बाद भी मरीजों को वेंटिलेटर व ऑर्डरिंग बेड की नहीं मिल रही सुविधा
3. बोले लीड :पांच वर्ष बाद भी मरीजों को वेंटिलेटर व ऑर्डरिंग बेड की नहीं मिल रही सुविधापांच वर्ष बाद भी मरीजों को वेंटिलेटर व ऑर्डरिंग बेड की नहीं मिल
परबत्ता । एक प्रतिनिधि प्रखंड मुख्यालय स्थित सीएचसी में गत पांच वर्ष से वेंटिलेटर व ऑर्डरिंग बेड उपलब्ध है, लेकिन गंभीर मरीजों को आज तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। लाखों की राशि से खरीदकर उपलब्ध कराए गए वेंटिलेटर व बेड सीएचसी में बेकार पड़ा हुआ है। प्रखंड के गंभीर मरीजों को भगवान भरोसे रेफर कर दिया जाता है। मरीज बचा तो अपने भाग्य से मौत हो गई तो भी अपने भाग्य से यह स्थिति यहां बनी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 के भीषण कोरोना काल को ध्यान में रखते हुए प्रखंड के लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए वर्ष 2020 में तत्कलीन विधायक के प्रयास से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा लाखों की राशि से वेंटिलेटर व दो ऑर्डरिंग बेड उपलब्ध कराया गया था।
गत 29 मई 2020 को तत्कालीन विधायक डॉ संजीव कुमार, डीडीसी रामनिरंजन सिंह व एसेचुवल डेवलपमेंट यूनिवर्सल के के. कुमार व सीएचसी प्रभारी डॉ पटवार्धन झा द्वारा बड़े तामझाम से आईसीयू का उदघाटन किया गया था। उद्धघाटन के दौरान इसके संचालन के लिये एक्सपर्ट डॉक्टर को भेजकर स्थानीय डॉक्टरों को तकनीकी जानकारी दी गई। स्थानीय डॉक्टर को संचालन के लिय्ए तकनीकी जानकारी के बाद चालू नहंी किया जा सका। वही वेंटिलेटर व बेड के उदघाटन के बाद सुविधा मिलने की आस पाले लोगों की उम्मीद काफूर हो गई। हालंाकि उदघाटन के दौरान उपस्थित तत्कालीन विधायक ने कहा था कि एक डॉक्टर होने के नाते अपनी जन्मभूमि की सेवा करना उनका पहला कर्तव्य है। ब्राज़ील निर्मित यह वेंटिलेटर मशीन अत्याधुनिक है। सीएचसी में गंभीर व जरूरतमंद मरीजों को आसानी से इस मशीन द्वारा कहीं भी ले जाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर भागलपुर व पटना जैसे बड़े शहरों तक ले जाते समय यह मशीन छह से आठ घंटे तक लगातार काम करने में सक्षम है। कोरोना महामारी के दौरान गंभीर मरीजों के इलाज में यह मशीन काफी उपयोगी साबित होगी। साथ ही हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए भी इसे लाभकारी बताया गया था। पर, आज तक यह सुविधा मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और लापरवाही पर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। रेफर करना बनी है चिकित्सकों की नियति : संसाधन के बावजूद इलाज के लिए आये गंभीर मरीजों का प्राथमिक उपचार बाद उसे फिलहाल तत्काल रेफर कर दिया जाता है। कुल मिलाकर सीएचसी के गंभीर मरीजों का रेफर करना नियति बनी हुई है, लेकिन विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बना हुआ है। आज तक स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी ने इसे संचालित करने की ओर पहल नहीं की है। बताया जाता है कि मैकेनिकल मेडिकल मशीनरी के प्रदेश उपाध्यक्ष व परबत्ता के तकालीन विधायक, डीडीसी आदि द्वारा 29 मई 2020 को संयुक्त रूप से उदघाटन किया गया था। बोले लोग : 1. वर्ष 2020 में एक कंट्रक्शन कंपनी द्वारा परबत्ता सीएचसी को वेंटिलेटर व दो ऑर्डरिंग बेड गिफ्ट के रूप में उपलब्ध कराया गया था। उपयोग के बिना बेकार पड़ा है। नवीन चौधरी, सीपीएम नेता। 2. गत 29 मई 2020 को तत्कालीन विधायक व अन्य अधिकारी ने बड़े ही तामझाम से संयुक्त रूप से उदघाटन किया था। लोगों की आस पूरी नहीं हुई। रवीन कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता। 3. उदघाटन के बाद लोगों को लगा था कि अब परबत्ता सीएचसी में इलाज के लिए आए गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर के सहारे दूर के अस्पताल तक ले जाया जा सकता है। मो. सुलेमान, युवा। 4. उदघाटन के पांच वर्ष बाद भी मरीजों को वेंटिलेटर व आर्डिरिंग बेड की सुविधा गंभीर मरीज को नसीब नहीं हो सका है। गंभीर मरीज को भगवान के भरोसे इलाज के लिए परिजन यहां से ले जाते हैं। चार्ली आर्या, छात्र नेता। 5. पांच वर्ष बाद भी वेंटिलेटर व ऑर्डरिंग बेड के संचालन नहीं होने से स्थानीय लोगों के बीच गुस्सा पनप रहा है। चालू करने को लेकर ठोस पहल होनी चाहिए। बिट्टू मिश्रा, छात्र नेता। 6. स्थानीय गंभीर मरीजों की परेशानी को लेकर लेकर वे डीएम व सीएस का जल्द ध्यान दिलाएंगे। जिससे पांच साल से सुविधा से वंचित मरीजों को जल्द लाभ मिल सके। प्रशांत किशोर, छात्र नेता। बोले अधिकारी : वस्तुस्थिति की तहकीकात बाद इस सुविधा के संचालन के लिए उच्चाधिकारी का ध्यान दिलाया जाएगा। जिससे लोगों को इसकी समुचित सुविधा मिल सके। डॉ कशिश राय, सीएचसी प्रभारी, परबत्ता। फोटो : कैप्शन: परबत्ता प्रखंड का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र।

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