अलौली: सालों से कागज पर चल रहा गुलयिा मुसहरी का आंगनबाड़ी केंद्र

Mar 03, 2026 01:25 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, खगडि़या
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अलौली: सालों से कागज पर चल रहा गुलयिा मुसहरी का आंगनबाड़ी केंद्र अलौली: सालों से कागज पर चल रहा गुलयिा मुसहरी का आंगनबाड़ी केंद्र

अलौली: सालों से कागज पर चल रहा गुलयिा मुसहरी का आंगनबाड़ी केंद्र

अलौली। एक प्रतिनिधि प्रखंड में संचालित अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्र कागज पर ही संचालित हो रहा है। गौड़ाचक पंचायत के महादलित टोला गुलरिया मुसहरी में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र संख्या 87 पिछले डेढ़ साल से बकरी का बथान बन कर रह गया है। ऐसी ही स्थिति चातर पंचायत अन्तर्गत रटनाहा गांव के केन्द्र संख्या 17 की स्थिति बतायी जा रही है। केन्द्र 87 के लिए नीति आयोग की राशि से अच्छा भवन बना है। जिसका उदघाटन तत्कालीन सांसद चौधरी महबूब अली केशर द्वारा किया गया था। केन्द्र की सेविका शकुंतला देवी जब तक संचालित की पंचायत की सबसे बेहतर व्यवस्था रही। इस सेविका की सेवानिवृत्ति डेढ़ साल पूर्व हो गई।

उसके कुछ माह तक किसी तरह का देख रेख नहीं होने के कारण सेंटर बंद रहा। उसके बाद बुधौरा गांव के वार्ड 14 में कार्यरत सेविका फूल कुमारी को प्रभारी सेविका बनाया गया। तब से सेंटर बकरी का बथान बनकर रह गया है। केन्द्र के भवन में निर्मित शौचालय, किचेन कक्ष की व्यवस्था यह बताती है कि यह वर्षो से नहीं खुला है। बताया जाता है कि गौड़ाचक पंचायत का यह सेंटर एलएस अनु वर्णवाल द्वारा देख रेख किया जाता है। वह कभी भी इस क्षेत्र में नहीं आती है। सहायिका फोटो देवी ने बताया कि भवन के आगे लोग बकरी बांधकर रखते हैं। सेंटर में कुछ लोग जलावन भी रख देते हैं। पोषाहार की सामग्री केन्द्र पर नहीं रहती है। प्रभारी सेविका के यहां ही रहती होगी। बुधौरा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में 12 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। सभी सेंटर कागज पर ही चलता है। पूछे जाने पर बताया कि डिजिटल व्यवस्था में गलत कैसे होता है तो बताया गया कि विभाग के पदाधिकारी कैसे देखते है यह तो वहीं जानते होंगे? स्टाफ ही सिखाते होंगे डिजिटल में चोरी तो सब कुछ संभव ही है। लोगों ने बताया कि सालभर पहले आईसीडीएस विभाग के डीपीओ समेत कई पदाधिकारी आए थे। ग्रामीण स्तर से उनके सम्मान के लिए पंचायत भवन में बैठक कर वस्तुस्थिति से अवगत कराने को सोचा था, परन्तु लोगों की बात सुनने को तैयार नहीं हुए। तब से कोई भी पदाधिकारी या स्टाफ को गांव में आते नहीं देखा गया है। बताया गया कि मंगलवार वं गुरुवार को बच्चों के लिए दूध पिलाने की व्यवस्था है। आज तक किसी भी सेंटर में दूध पीते नहंी देखा गया। यदा कदा खिचड़ी मिलते देखा जाता है। सब कुछ कागज पर ही चलता है। खेल-खेल में पढ़ाई जाने वाली सामग्री नदारद: आंगनबाड़ी केन्द्र को प्ले स्कूल के रूप में माना जाता है। इसके लिए खेल- खेल में पढ़ाई जाने वाली सामग्री जो केन्द्र को प्राप्त होती रही। आखिर वह कहां से अधिकांश जगह खाना बनाने वाली सामग्री यहां तक कि केन्द का वोर्ड भी देखने को नहीं मिलता। चावल उपलब्ध कराया जाता है। अधिकतर सेंटर की सेविका अपने ही घर में रख लेती हैं। बाढ़ क्षेत्र के पंचायतों में नहीं चलता केन्द्र: बाढ़ क्षेत्र के पंचायतों में आगनबाड़ी केन्द्र का संचालन कागज पर ही अधिकतर होने की बात कही जाती है। नदी पार के गांव में कोई देखरेख करने वाले भी नहीं जा पाते हैं। चातर पंचायत के दिघनी गांव के केन्द्र सिर्फ दिखावा का सेंटर बन कर रह गया है। बताया जाता है क यहां एलएस भी कभी नहीं आती है। मनमर्जी ही केन्द्र चलता है। रटनाहा गांव के केन्द्र संख्या 17 चल रहा है पांच वर्षो से प्रभार में: ग्रामीणों ने बताया कि चातर पंचायत के रटनाहा महदलित टोला का केन्द्र संख्या-17 की सेविका शांति देवी का पांच साल पूर्व ही सेवानिवृत्ति के बाद निधन हो गया। वह डीह संझौती गांव के रहने वाली थी। पदाधिकारी की मनमानी के कारण दूर पंचायत की सेविका रटनाहा में काम कर रही थी। जिस पर कई आपत्ति की गई, परन्तु सुनी नहीं गई। सेवानिव्ृत्त होने के बाद रटनाहा गांव के ही केन्द्र संख्या 189 की सेविका अंजनी कुमारी को केन्द्र 17 का प्रभार मिला। सेंटर के बच्चों को अब तक किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है। कार्यालय मैनेज पर ही चल रहा होगा। बोले लोग : 1. आईसीडीएस विभाग अब तक अपने उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं कर पा रहा है। सरकारी राशि की बंदरबांट पर रोक लगनी चाहिए। वरुण कुमार, पंचायत समिति सदस्य। 2. सरकार लोगों को सुविधाएं तो देती हैं, परन्तु धरातल पर सफल बनाने का प्रयास सफल नहीं हो रहा है। विभाग को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। अमरेंद्र सिंह, पूर्व जदयू प्रखंड अध्यक्ष। 3. अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्र का मानक अनुसार संचालन नहीं होने से स्कूल पूर्व की शिक्षा बच्चों को नहीं मिल पाती है। पंचायत प्रतिनिधि इस पर गंभीरता दिखाएंं। सत्यनारायण पासवान, जिप सदस्य क्षेत्र संख्या- दो, अलौली। 4. विभाग जितना भी डिजिटल माध्यम से बेहतर कार्य दिखा ले। जब तक पदाधिकारी एवं स्टाफ जिम्मेदार नहीं होंगे तब तक व्यवस्था ठीक नहीं होगी। देवी गंगा, पूर्व प्रखंड प्रमुख, अलौली 5. आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों के लिए विभाग सप्ताह में दो दिन दूध पीने की व्यवस्था की है। जो नहीं मिलती है। पोषाहार को सार्वजनिक रूप से वितरण व्यवस्था होनी चाहिए। अंशु झा, जिला प्रवक्ता, भाजपा। 6. अस्सी के दशक के संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र स्टाफ के खाने पीने का साधन बन कर रह गया है। प्ले स्कूल की तरह संचालन व्यवस्था होनी चाहिए। नरेश सिंह, पूर्व जिप उपाध्यक्ष। बोले अधिकारी: सीडीपीओ छुट्टी में है। प्रभार में काम कर रही हूं। मैं एलएस के रूप में अलौली में कार्यरत हूं। इस समस्या से सीडीपीओ को अवगत करा दूंगी। मोनिका प्रभा, प्रभारी सीडीपीओ, अलौली। बोले पंचायत मुखिया: गौड़ाचक पंचायत में कार्यरत 12 आंगनबाड़ी केन्द्र को व्यवस्थित कर प्ले स्कूल की तर्ज पर बेहतर करने का प्रयास किया गया। आईसीडीएस विभाग के पदाधिकारी व स्टाफ का सहयोग नहीं मिलने के कारण एक भी केन्द्र का संचालन ठीक नहीं है। कार्यालय की मिलीभगत से कागज पर ही केन्द्र चल रहा है। राकेश कुमार, मुखिया, गौड़ाचक पंचायत, अलौली। फोटो : 4 कैप्शन: अलौली: गौड़ाचक पंचायत के गुलरिया मुसहरी गांव में बने आंगनबाड़ी केन्द्र भवन बना बकरी का आश्रयस्थल। प्रस्तुति : सतीश कुमार।

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