Hindi NewsBihar NewsKhagaria NewsMarandi Health Center Over 10 Years of Insufficient Medical Facilities for 20 000 Residents
एएनएम के भरोसे मारनडीह अतिरिक्त पीएचसी

एएनएम के भरोसे मारनडीह अतिरिक्त पीएचसी

संक्षेप:

मारनडीह गांव में स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछले 10 वर्षों से एएनएम के भरोसे चल रहा है। यहां 3 डॉक्टर तो हैं, लेकिन एक एएनएम ही रोगियों को सेवा देती है। अस्पताल का भवन किराए पर है और सुविधाएं बहुत सीमित हैं। स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है।

Nov 29, 2025 01:26 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, खगडि़या
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अलौली। आनंदपुर मारन पंचायत के मारनडीह गांव में स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र मारनडीह पिछले 10 वर्षो से संचालित होते हुए भी एएनएम के भरोसे चल रहा है। महादलित पंचायत एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के 20 हजार आबाादी के लिए इस अस्पताल को तीन डॉक्टर दिया गया। जिसमें दो डॉक्टर एमबीबीएस एवं एक आयुष दिया गया। जो किराए के करकट भवन में संचालित है। एक एएनएम निर्मला कुमारी के भरोसे है। यहां दो एएनएम होना चाहिए, परन्तु वर्षो से एक ही एएनएम प्रतिदिन आकर रोगी को दवा बांटने का काम करती है। बताया जाता है कि अस्पताल के नाम पर मारनडीह गांव में डेढ़ बीघा जमीन उपलब्ध है, परन्तु अब तक इसके भवन निर्माण की दिशा में पहल नहीं हो पायी है।

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ग्रामीण चिकित्सक के घर में किराया पर भवन चल रहा है। जहां एक चौकी एवं मात्र प्लास्टिक की कुर्सी लगा दिखती है। इस अस्पताल की ऐसी व्यवस्था देखकर कहा जा सकता है कि क्षेत्र की बदहाली स्थिति के अनुसार यहां की व्यवस्था माकूल विभाग समझती होगी। इस क्षेत्र में अधिकांश परिवार महादलित के हैं। जिनके पास अब तक विकास की किरण अब तक नहीं पहुंची है ना ही यहां के लोगों में संघर्ष करने की क्षमता भी दिखती है। अस्पताल में तीन डॉक्टर हैं पदस्थापित : बताया जाता है कि जब तक डॉ धर्मेन्द्र कुमार यहां रहे तब तक मरीजों को समुचित लाभ मिलता रहा। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ डीएन पासवान की आकस्मिक मौत होने के कारण विभाग ने डॉ धर्मेन्द्र कुमार को जिला प्रतिरक्षण पदाधिकाारी के पद पर प्रतिनियोजन कर दिया। जो वर्त्तमान में सदर अस्पताल के डीएस पद पर बताये जाते हैं। दूसरे डॉक्टर पदस्थापित हुए डॉ मनोज पासवान तो इन्हें न्यायालय के चिकित्सक के रूप में प्रतिनियोजित कर दिया गया, वह भी चले गये। तीसरे आयुष चिकित्सक डॉ सुमेघा कुमारी पदस्थापित हुई। पदस्थापन काल से अब तक कभी अपने अस्पताल का रास्ता भी नहीं देख पायी। स्थानीय लोगों को अब तक यह भी पता नहीं है कि यहां तीन डॉक्टरों का पदस्थापन भी है। एपीएचसी में दो एएनएम का पदस्थापन होना था वह भी नहीं है। अतिरिक्त पीएचसी को जो सुविधा उपलब्ध होना है वह भी प्राप्त नहीं है। स्वास्थ्य उपकेन्द्र स्तर की भी सुविधा नहीं मिल पायी है। रोगी कल्याण समिति का गठन होना था, परन्तु देखने से तो नहीं लगता कि यहां गठन भी हुआ है या नहीं। सरकार या स्वस्थ्य विभाग इस अस्पताल की ऐसी व्यवस्था रखकर आखिर क्या क्षेत्र के लोगों को सुविधा देना चाहती है यह तो विभाग ही बेहतर समझ पाती होगी? खासकर बाढ़ समय में इस अस्पताल की व्यवस्था में कुछ बदलाव होता तो यहां के मरीजों को कुछ लाभ मिल सकता था। वरीय पदाधिकारी नहीं कर पाए निरीक्षण : स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक जिला स्तर के प्रशासनिक एवं विभागीय पदाधिकारी अब तक निरीक्षण में नहीं पहुंच पाया है। यदा कदा ही प्रखंड स्तर के पदाधिकारी का निरीक्षण हो पाया है। फिर भी अस्पताल की दशा दिशा में कुछ भी परिवर्त्तन नहीं हो पाया है। मारनडीह गांव जाने के लिए नदी पार कर जाना होता है और अब तक पहुंच सड़क भी नहीं बनी है। जिसके कारण आवा जाही खेत की पगडंडी से ही पैदल जाना एक मात्र विकल्प है या बाढ़ के समय में नाव से ही। सुविधा मिले तो मरीजों को मिलेगा लाभ : आनंदपुर मारन वं दहमा खैरी खुटहा पंचायत के अतिरिक्त दूसरे पंचायत के कई टोला के बीस हजार आबादी के मरीज स अस्पताल का लाभ ले सकते है। प्रसव कराने सीचसी या सदर जाना नहीं पड़ेगा। एएनसी जांच की भी सुविधा या किसी तरह का शिविर भी यहां नहीं लग पाता है। पूरी बाढ़ आने पर चलंत नौका एंबुलेंस की व्यवस्था यदा कदा देखी जरती है। बोले अधिकारी : मारनडीह अस्पताल को डेढ़ बीघा जमीन है। भवन निर्माण के लिए विभाग को लिखा गया है। भवन एवं भौगोलिक स्थिति के कारण व्यवस्था सही नहीं हो पायी है। जल्द ही स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगी। - डॉ मनीष कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अलौली।