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डुमरी पुल के ध्वस्त होने से बढ़ गई मंहगाई

डुमरी पुल के ध्वस्त होने से बढ़ गई  मंहगाई

एक पुल का टूटना जनता पर कितना असर डालता है। इसका जीता-जागता उदाहरण डुमरी पुल है। पुल के टूटने का असर बेलदौर प्रखंड सहित पूरे कोसी क्षेत्र पचास लाख आबादी पर पड़ा है। बता दें कि उत्तर बिहार की लाईफ लाइन कही जाने वाली बीपी मंडल सेतु के क्षतिग्रस्त होने के साथ ही पुल के उत्तरी भाग में मंहगाई बढ़ गई है।

पुल के उत्तरी भाग में पेट्रोल, डीजल से लेकर घर बनाने वाले मेटेरियल तक का दाम बढ़ा हुआ है। यह सिलसिला एक दो दिन नहीं, पूरे आठरह वर्षों से चला आ रहा है। यहां की जनता मंहगाई की मार झेल रही है। ऐसे में सवाल उठाना लाजिमी है। बताया जाता है कि वर्ष 2010 के 29 अगस्त को डुमरी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर वर्ष 2011 में 17 करोड़ की लागत से बनाये गये स्टील पुल भी 19 अगस्त 2014 को जवाब दे गया। पहले कोशी के कटाव के कारण डुमरी पुल का पाया धंसा था।

दूसरी बार कोसी के तेज करंट में स्टील पुल बह गया। हालांकि फरवरी 2016 से 50 करोड़ की लागत से डुमरी पुल का निर्माण एसपी सिंगला कंपनी द्वारा किया जा रहा है। इसे 16 मई 2018 तक पूरा करना था। हालांकि अब अगस्त 2018 तक पुल का पूरा करने की बात कंपनी के अधिकारियों द्वारा कही जा रही है। हालांकि एकमात्र आवागमन का सहारा जुगाड़ पुल था। कोसी नदी के जलस्तर में वृद्घि होने के बाद जुगाड़ पुल भी 26 मई को बंद हो गया। अब एकमात्र आवागमन का सहारा नाव ही बचा हुआ है। जबकि यह एनएच के अंतर्गत आता है।

नहीं मिल रहा कोई मक्का के खरीददार: डुमरी पुल के बंद होने के कारण मक्का का खरीददार भी नहीं मिल रहा है। जबकि मक्का की खेती के लिए बेलदौर प्रखंड प्रसिद्घ है। यहां के किसानों को कम रेट पर मक्का बेचना पड़ता है। पुल रहने के कारण पहले से खगड़िया एवं मानसी रैक प्वाइंट पर मक्का पहुंचता है। यही कारण है कि बेलदौर प्रखंड में प्रति क्विंटल 50 रुपये घट जाता है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि किसानों से लेकर आम लोगों को रोजाना लाखों का घाटा हो रहा है।

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  • Web Title:Due to collapse of Dumri bridge, dearness increased