
दिघौन पंचायत के मनरेगा योजना के बिचौलिया पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश
::::पेज पांच की लीड:::::::::::दिघौन पंचायत के मनरेगा योजना बिचौलिया पर एफआईआर दर्जदिघौन पंचायत के मनरेगा योजना बिचौलिया पर एफआईआर दर्जदिघौन पंचायत के
खगड़िया । नगर संवाददाता बेलदौर प्रखंड क्षेत्र के दिघौन गांव के एक बिचौलिया कुमार विमल राज पर कार्यक्रम पदाधिकारी को 48 घंटे के अंदर एफआईआर दर्ज करने के आदेश डीडीसी अभिषेक पलासिया ने दिए हैं। वहीं दिघौन पंचायत के मुखिया, तत्कालीन पंचायत रोजगार सेवक सह वर्त्तमान पदस्थापन चौथम साजन मुकेश व वेंडर कृष्णा ट्रेडर्स से डीडीसी ने 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। डीडीसी ने बेलदौर मनरेगा पीओ को दिए आदेश में कहा कि दिघौन गांव के आवेदक अरविन्द शर्मा ने आवेदन देकर शिकायत किया था कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में पशु शेड के निर्माण क ायर्ककी तीन योजना में लगे राशि उपलब्ध नहीं कराने की बात कही है।

आवेदन के सज्ञथ दिघौन के रहने वाले कुमार विमल राज द्वारा सरपंच व अन्य ग्रामीणों के उपस्थिति में सहमति पत्र प्राप्त हुआ है। जिसमें उल्लेख किया गया है कि मैं कुमार विमल राज, सभी चारों लाभार्थी का रूपण कृष्णा ट्रेडर्स के पास से ले लिया हूं और मैं अपने निजी काम में खर्च कर दिया हूं। हमारे पास राशि उपलब्ध नहंी है। चारों लाभार्थी का कुछ दो लाख 86 हजार 400 रूपए होता है। जिसे ग्रामीण पंच के बीच आवेदक को वापस करने की लिखित सहमति दी गई है। डीडीसी ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि कुमार विमल राज, मनरेगा योजना में बिचौलिया के रूप में कार्यकिया है। जबकि मनरेगा अधिनियम के तहत वेंडर द्वारा कार्य किया जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट होता है कि श्री कुमार द्वारा बिचौलिया के रूप में कार्य किया गया जो नियमानुकूल नहंी है। उन्होंने पीओ को आदेश दिया हैकि 48 घंटे के अंदर सुसंगत धाराओं के तहत स्थानीय थाना में कुमार विमल राज पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए प्रतिवेदन भेजें। मुखिया, तत्कालीन रोजगार सेवक व वेंडर से पूछा गया स्पष्टीकण: डीडीसी अभिषेक पलासिया ने शिकायतकत्र्ता के आवेदन पर जांच के बाद कार्रवाई करते हुए दिघौन पंचायत के मुखिया, तत्कालीन रोजगार सेवक एवं वेंडर से स्पष्टीकरण पूछा है। उन्हेंाने मुखिया से स्पष्टीकरण पूछते हुए कहा कि मनरेगा योजना के तहत उक्त योजनाओं का क्रियान्वयन एजेंसी ग्राम पंचायत है तथा इस योजना का वाउचर पर मुखिया के द्वारा अनुमोदन दिया जाता है। आवेदक के आवेदन देने के बाद जांच में मामला प्रकाश में आने के बाद स्पष्ट होता हैकि आपके द्वारा मनरेगा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए कार्य कराया गया है। मुखिया से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। डीडीसी ने वेंडर कृष्णा टे्रडर्स से स्पष्टीरकण पूछते हुए कहा कि इस योजना में वेडर को कार्य किया जाना था लेकिन उन्होंने नहंी किया। स्पष्टीकरण पूछते हुए कहा कि 24 घंटे के अंदर अपना रखते हुए सुनिश्चित करें कि क्यों नहीं आपके प्रतिष्ठान को काली सूची में दर्ज किया जाए। निर्धारित अवधि तक स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने पर माना जाएगा कि इस संबंध में आपको कुछ नहीं कहना है। ऐसे में अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीडीसी ने पीआरएस से स्पष्टीकरण तलब करते हुए कहा कि मनरेगा योजना के तहत पंचायत स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण की पूर्ण जिम्मेवारी आपकी है। जांच के दौरान मामला के प्रकाश में आने के बाद स्पष्ट होता है कि मनरेगा के अधिनियम के उल्लंघन करते हुए कार्य कराया गया जो आपके कार्य के प्रतिकूल है। बोले अधिकारी मनरेगा योजना में नियम के विरूद्ध कार्य किया जाना बर्दाश्त नहीं होगा। किसी भी योजना के क्रियान्वयन में बिचौलिया की भूमिका नियम के विपरीत है। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। अभिषेक पलासिया, डीडीसी, खगड़िया।

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