Katihar News: अगले तीन दिन मेघों की मेहरबानी, भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट
Katihar News: अगले तीन दिन मेघों की मेहरबानी, भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट अगले तीन दिन मेघों की मेहरबानी, भारी बारिश और वज्रपात का अलर्टअगले तीन दिन मेघों की मेह

Katihar News: कटिहार, वरीय संवाददाता बीते कुछ दिनों से जिले का मौसम पूरी तरह बदला हुआ है। आसमान में लगातार बादलों की आवाजाही और रुक-रुककर हो रही हल्की बारिश से लोगों को उमस और भीषण गर्मी से राहत मिली है। सोमवार को भी दिनभर मौसम सुहाना बना रहा। बीच-बीच में धूप निकली, लेकिन बादलों की लुकाछिपी जारी रही। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो-तीन दिनों तक जिले में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं 14 से 15 जुलाई के आसपास सीमांचल के कुछ इलाकों में भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है。
कृषि विज्ञान केंद्र का तापमान विवरण
कृषि विज्ञान केंद्र, कटिहार के कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार ने बताया कि पिछले तीन दिनों का औसत अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। हवा की औसत गति 6.25 किलोमीटर प्रति घंटा रही। रविवार को सुबह का तापमान 30.7 डिग्री तथा दोपहर में 34.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि वर्षा की गतिविधियों के कारण इस सप्ताह अधिकतम तापमान 29 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।
किसानों के लिए सुझाव
बारिश को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा हुई है वहां संचित वर्षा जल का उपयोग करते हुए प्रभात, राजेन्द्र सरस्वती और राजेन्द्र भगवती जैसी अगात धान की किस्मों की बुआई जुलाई के मध्य तक पूरी करने की सलाह दी गई है। जहां वर्षा कम हुई है वहां ऊंची जमीन में राजेन्द्र भगवती और राजेन्द्र नीलम किस्म की सीधी बुआई (डीएसआर) करने को कहा गया है। बुआई से पहले कार्बेन्डाजिम दो ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार तथा 10 से 15 दिन पुरानी नर्सरी में समय पर खरपतवार नियंत्रण करने की भी सलाह दी गई है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे धान की रोपाई शुरू कर सकते हैं।
कम वर्षा की आशंका
कम वर्षा की आशंका को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने ऊंची जमीन पर धान के बजाय मोटे अनाज और अरहर की खेती को बेहतर विकल्प बताया है। कृषि वैज्ञानिकों ने पशुपालकों से भी अपील की है कि वर्षा के मौसम में पशुओं को हमेशा स्वच्छ और ताजा पेयजल उपलब्ध कराएं तथा बारिश का गंदा या दूषित पानी पीने से बचाएं, ताकि मौसमी बीमारियों से पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


