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कटिहारसदर अस्पताल के आईसीयू में रोगी की मौत पर हंगामा

हिन्दुस्तान टीम,कटिहारPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 05:20 AM
सदर अस्पताल के आईसीयू में रोगी की मौत पर हंगामा

कटिहार | एक संवाददाता

सदर अस्पताल के आईसीयू में इलाजरत पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मी लघुकांत झा की सोमवार को मौत हो गई। इसके बाद उनके परिजनों व एक कोविड संदिग्ध की मौत पर उसके घरवालों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लागते हुए जमकर हंगामा किया। लोगों को आक्रोशित देखकर अस्पताल प्रबंधन ने नगर थाना को इसकी सूचना दी। एक सेक्शन फोर्स सदर अस्पताल पहुंच कर लोगों को समझा बुझा कर किसी तरह मामला शांत कराया।

रोगी के पुत्र गामी टोला निवासी रौशन झा ने बताया कि उनके पिता पांच दिन पहले घर में एक जनेऊ कार्यक्रम में भाग लेकर मधुबनी से कटिहार आये थे। उन्हें एक माह से कमजोरी की शिकायत थी। जांच पर हीमोग्लोबिन 6.1 बताया गया। चिकित्सक द्वारा रक्त चढ़ाने की सलाह दी गई। निजी चिकित्सक की सलाह पर पांच दिन पूर्व रक्त चढ़ाया गया। इसके बाद हीमोग्लोबिन का स्तर थोड़ा बढ़ा। एक यूनिट और ब्लड चढ़ाने के लिए सदर अस्पताल पहुंचे तो तैनात डॉक्टर ने रोगी की हालत खराब कहते हुए रेफर कर दिया। केएमसीएच ले गये तो वहां पर चिकित्सक द्वारा रोगी की हालत सही बताते हुए जांच रिपोर्ट लेकर ही भर्ती करने की बात कही गई। इसके बाद रक्त चढ़ाने के लिए वे लोग फिर से रविवार की दोपहर बाद करीब 2 से 3 बजे लेकर पहुंचे। इस समय पिता जी अपने से चलकर अस्पताल के अंदर गए। डॉक्टर कहने लगे कि जब तक कोविड की जांच नहीं होगी तब तक ब्लड नहीं चढ़ाया जा सकता है। इसके बाद एमएलसी अशोक अग्रवाल के कहने पर डॉक्ट द्वारा आईसीयू में भर्ती किया गया। इस बीच कोविड का दवा चलाई गई। रात के दो बजे उनके पिता की मौत आईसीयू में हो गई। परिजनों का आरोप है कि भर्ती करने से दोपहर दो बजे एंबुलेंस में रैपिड एंटिजेन किट से जांच के लिए सैंपल लिया गया और रिपोर्ट करीब आठ बजे बाद सोमवार को दोपहर 12 बजे दी गई। वह भी तब जब परिजन हंगामा करना शुरू किया।

क्या है स्वास्थ्य कर्मी व डॉक्टर पर आरोप: बजरंग दल के रक्तवीर विष्णु शांडिल्य ने बताया कि सदर अस्पताल में रोगियों को इलाज करने में काफी लापरवाही बरती जाती है। लघुकांत झा एक माह से रक्त की कमी से परेशान थे। इसकी जानकारी देने पर रक्त अस्पताल में नहीं चढ़ाया गया। रक्त चढ़ाने के बदले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया गया। जांच रिपोर्ट नहीं देने के कारण कोविड की दवा दी गई। जिस रैपिड एंटिजेन किट की जांच रिपोर्ट 10 से 20 मिनट में मिल जाती है। उस रिपोर्ट को 8 घंटे बाद उपलब्ध कराया गया। रात के समय स्थिति बिगड़ने पर रोगी को देखने के लिए डॉक्टर तैयार नहीं हुए। स्वास्थ्य कर्मी सोये हुए थे। गार्ड ने कहा कि रात में सबकुछ ऐसे ही चलता है। सुबह होने पर ही रोगी को देखा जाएगा। वहीं रोगी की मौत के पूर्व और बाद में कोविड की जांच की गई। दोनों जांच रिपोर्ट निगेटिव बताई गई। इस लापरवाही के कारण रोगी की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद को इस मामले में एक्शन लेना चाहिए ताकि फिर किसी रोगी की मौत नहीं हो सके।

लोगों ने उठाये सवाल: आईसीयू में रोगी की मौत पर लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठाया है। लोगों का कहना है कि बिना जांच का कोविड की दवा क्यों दी गई। जांच से पूर्व रक्त क्यों नहीं चढ़ाया गया। जांच रिपोर्ट देने में 8 घंटा का समय क्यों लगा। जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद पीपीई किट पहनकर लाश को आईसीयू से बाहर क्यों निकाला गया। रात के समय डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मी सोये हुए थे। रोगी की हालत गंभीर होने पर इलाज क्यों नहीं किया गया।

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