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7 अगस्त, 2020|4:21|IST

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परेशानी: फॉल आर्मी वर्म से मक्के के किसानों की जंग जारी

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जिले में फॉल आर्मी कीट का आक्रमण जिले के मक्का उत्पादन के मामले में कई क्षेत्र में देखा जा रहा है।

जिसकी पहचान विशेषज्ञों द्वारा उक्त कीटाणु के रुप में की जा रही है। जिले में केला, आलू एवं मखाना के बाद अब मक्का की खेती को किसानों ने नकदी उत्पादन के रुप में शुरू किया है। जिले में 35 हजार हेक्टेयर में किसानों ने मक्के की खेती की है। लेकिन इस वर्ष फॉल आर्मी किट के प्रभाव से नुकसान होने की संभावना प्रबल होने लगी है।

कैसे करें खेतों में फॉल आर्मी किट की पहचान

कृषि विभाग इसके लिए किसानों को जागरुक कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक पंकज कुमार ने कीटाणु के पहचान के बारे में बताया कि फॉल आर्मी वर्म के वयस्क पतंगे तीव्र उड़ान भरनेवाले होते हैं जो मेजमान पौधों की तलाश में 100 किमी से भी अधिक उड़ सकते हैं। विशिष्ट फेरोमोन जाल फॉल आर्मी वर्म के नर पतंगों को आकर्षित करते हैं। नर पतंगों में दो लक्षण होते हैं यानी केन्द्र की ओर एक भड़कीला रंग का स्थान और अग्रपंख के शिखर भाग पर एक सफेद पैंच तथा मादा के अग्रपंख बेजान एवं धुंधले निशानवाले होते हैं। मादा पतंग अपने जीवनकाल में एक हजार से अधिक अंडेदेते हैं जो सात से आठ दिनों में वयस्क कीट में परिवर्तित हो जाता है।

कैसे होगा इसपर नियंत्रण

केवीके वैज्ञानिकों के दल द्वारा सम्बन्धित प्रखंडों में जाकर इसके बचाव की जानकारी दिया जा रहा है। श्री कुमार ने बताया कि रसायनिक कीटनाशकों में से स्पिनेटोरम 11.7 प्रतिशत एससी 0.5 मिली प्रतिलीटर पानी तथा क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 18.5 एससी 0.4 मिली प्रति लीटर एवं थियामेथोक्साम 12.6 प्रतिशत +लैम्डा साइहैलोथ्रीन 9.5 प्रतिशत जेडसी 0.25 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से नियंत्रण पाया जा सकता है।

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