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बभनी गांव के शिवमंदिर का इतिहास है वर्षों पुराना

बभनी गांव के शिवमंदिर का इतिहास है वर्षों पुराना

प्रखंड क्षेत्र के बभनी गांव के शिवमंदिर का इतिहास वर्षों पुराना है। पहले यहां फूस घास का एक छोटा सा मंदिर था, जहां भक्तों को जलाभिषेक करने में परेशानी होती थी। इसी को देखते हुए दो वर्ष पूर्व गांव के हरेकृष्ण प्रसाद के पुत्र इंद्र कुमार सिन्हा के द्वारा मंदिर का पुनर्निमाण किया गया। पूर्व मेंे मंदिर की स्थापना किसके द्वारा किया गया। इस बात की जानकारी ग्रामीणों को नहीं है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में महंत बाबा के नाम के भक्तों के द्वारा इस शिव मंदिर का देखभाल किया जाता था।

ग्रामीणों के अनुसार उनके बाद अधिवक्ता शिव प्रसाद के द्वारा मंदिर की देखभाल किये जाने लगा। ग्रामीणों की माने तो शिव मंदिर में जो भी शिव भक्त सच्चे दिन से मन्नते मांगते हैं उनकी मन्नते बाबा भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर में जलाभिषेक के लिए मंगनपट्टी, सोहथा, खरवा टोल, बघवाकोल, महाराजी कनवाडीह, करहिया टोला आदि गांव के श्रद्धालु आते हेंै। गांव के शिव भक्त राकेश कुमार साह ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो श्रद्धालु सच्चे हृदय से शिव में पूजा अर्चना करते हैं उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर अष्टयाम संकीर्तन का भी आयोजन किया जाता है तथा सावन के सोमवारी को भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है। मौके पर मेला जैसा नजारा लगता है। मंदिर के पुजारी सत्येन्द्र झा ने बताया कि शिव भक्तों द्वारा बड़े ही धूमधाम और गाजे बाजे के साथ शिव मंदिर में जलाभिषेक करने पहंुचते हैं। सावन के हर सोमवार को मंदिर का दृश्य कुछ और हो जाता है।

ग्रामीण दिगम्बर झा, लखन प्रसाद साह, गोपाल झा, सदानंद झा, प्रमोद सिन्हा, मंटू सिन्हा, सरपंच दिलीप यादव, मुखिया राजेश साह, कपिलेश्वर प्रसाद अम्बष्ट, दिनेश महतो, विमल मंडल आदि ने बताया कि वर्तमान में शिवमंदिर का देखरेख की जिम्मेवारी हरे कृष्ण प्रसाद के पुत्र प्रखंड विकास पदाधिकारी इंद्र कुमार सिन्हा द्वारा किया जाता है। कमेटी द्वारा विशेष ध्यान रखा जाता है जिससे जलाभिषेक करने आये श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

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  • Web Title:The history of Shivnandir of the village of Bhabani is years old