Tamil Nadu team probes banana - तामिलनाडु की तीन सदस्यीय टीम ने केले की जांच की DA Image

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तामिलनाडु की तीन सदस्यीय टीम ने केले की जांच की

तामिलनाडु की तीन सदस्यीय टीम ने केले की जांच की

केलाचंल के नाम से प्रसिद्ध जिले के फलका प्रखंड में नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ बनाना तिरुचि तामिलनाडु के वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम आकर उन्नत कृषक अमित गुप्ता के केले खेतों में पनामा विल्ट नामक रोग से ग्रसित पौधों की जांच की। इस लाईलाज रोग से संबंधित विस्तृत जानकारी एवं शोध के लिए रोग ग्रस्त कंदों को अपने साथ ले गये।

जांच के दौरान वैज्ञानिकों की टीम केले की खेत में घूम-घूमकर रोगग्रस्त पौधों को कटवा कटवा कर थम जर व कंद का बारीकि से मुआयना किया। उसके बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि रोग ग्रस्त क्षेत्र में ट्रैक्टर से जुताई करने के बाद अगर वही ट्रैक्टर बगैर धोय किसी दूसरे खेतों में जुताई करेगा तो इस रोग का उस खेत की फसलों में भी होगा। इसका मात्र बस एक उपाय है रोकथाम जिसके लिए रिसर्च सेंटर में बायोजन कंट्रोल नामक दवा तैयार किया जा रहा है।

इस रोग से पूर्णरुप से छुटकारा पाने के लिए सभी कृषकों को एक साथ 25 साल तक खेती बंद करना होगा तभी खत्म हो सकता है। बावजूद इसके कृषक अमित कुमार के ख्ेात में 315 प्रकार के केले की प्रजाति लगायी गयी है। जिस पर यह रिसर्च होगा कौन सी प्रजाति की केले को कोई रोग नहीं लगा। अगर उसमें से कोई ऐसे प्रजाति का केला निकल आता है तो उसे डेवलप किया जायेगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि पनामा विल्ट नाम रोग का कीट बिना कुछ खाये 25 साल तक जिंदा रह सकता है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व भी सबौर और समेत कई अन्य जगहों से वैज्ञानिकों की टीम आकर जांच किया। मगर आज तक इस रोग की दवा तलाश में नकाम रहे। पनामा विल्ट नामक रोग के कारण आधे से आधे किसान केला की खेती को छोड़ चुके हैं। गलवा रोग के कारण खेती घाटे का सौदा बनता गया। वैज्ञानिकों की टीम में आर ढंगा, डा.एसएम सरस्वती, डा. लोकनाथ शामिल थे।

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