कमल का समर कैम्प से बच्चों की भाषा-गणित होगी मजबूत
कमल का समर कैम्प से बच्चों की भाषा-गणित होगी मजबूत कमल का समर कैम्प से बच्चों की भाषा-गणित होगी मजबूतकमल का समर कैम्प से बच्चों की भाषा-गणित होगी मजबू

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि जिले के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले कमजोर बच्चों को भाषा और गणित में दक्ष बनाने के लिए अगले महीने से बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। समग्र शिक्षा अभियान और प्रथम संस्था के सहयोग से 1 जून से 30 जून तक जिलेभर में कमल का समर कैम्प’ आयोजित किया जाएगा। इस अभियान के तहत कक्षा 5 और 6 के वैसे बच्चों को चिन्हित किया जाएगा, जिन्हें सरल कहानी पढ़ने, समझने या बुनियादी गणितीय सवाल हल करने में कठिनाई होती है।
समर कैम्प की तैयारी
जिला शिक्षा विभाग ने इसे लेकर तैयारी तेज कर दी है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) पंकज कुमार ने सभी प्रारंभिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए समुदाय स्तर पर समर कैम्प के सफल संचालन की तैयारी शुरू करने को कहा है।
कैम्प का मुख्य उद्देश्य
इस बार समर कैम्प का मुख्य उद्देश्य वैसे बच्चों को उच्च प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करना है, जो भाषा और गणित की बुनियादी दक्षता में पीछे रह गए हैं। गांव और टोला स्तर पर चलने वाले इस कैम्प में प्रतिदिन एक से डेढ़ घंटे तक बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई कराई जाएगी। कहानी सुनाना, पठन गतिविधि, डिक्शनरी-पिक्सनरी, समूह चर्चा और गणितीय गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता विकसित की जाएगी।
स्वयंसेवकों की भूमिका
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के सभी मध्य विद्यालयों से दो से तीन स्वयंसेवकों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज कर्मी और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े युवा भी इस अभियान से जुड़ेंगे। स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर बच्चों के साथ विशेष शिक्षण गतिविधियां संचालित कराई जाएंगी।
कैम्प का स्थान
समर कैम्प के लिए समुदाय आधारित स्थानों का चयन किया जाएगा। पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, मंदिर प्रांगण, हवामहल और नजदीकी विद्यालय भवनों में कैम्प संचालित होंगे। प्रत्येक कैम्प में 10 से 15 या उससे अधिक बच्चों को शामिल किया जाएगा।
सामुदायिक भागीदारी
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान पूरी तरह सामुदायिक भागीदारी पर आधारित होगा और इसके लिए अलग से कोई राशि निर्धारित नहीं की गई है। स्वयंसेवक स्वेच्छा से योगदान देंगे। हालांकि उन्हें डिजिटल स्किल्स और शिक्षण कौशल से संबंधित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
बच्चों की पढ़ाई की स्थिति
एएस ईआर2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए विभाग ने माना है कि राज्य में बच्चों की पढ़ाई की बुनियादी स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। बिहार में कक्षा पांच के केवल 43.6 प्रतिशत बच्चे ही कक्षा दो स्तर का पाठ पढ़ पा रहे हैं, जबकि मात्र 36 प्रतिशत बच्चे भाग के सवाल हल कर पा रहे हैं। ऐसे में यह समर कैम्प बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
वर्जन
समर कैम्प बच्चों के भाषा एवं गणितीय कौशल को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। समुदाय और स्वयंसेवकों की भागीदारी से अधिक से अधिक कमजोर बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। विद्यालय प्रधानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पोषक क्षेत्र में शिक्षाप्रेमियों और स्वयंसेवी युवाओं को जोड़कर अभियान को सफल बनाएं। जिला एवं प्रखंड स्तर से लगातार अनुश्रवण किया जाएगा तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों की प्रगति की मॉनिटरिंग भी होगी।
पंकज कुमार, डीपीओ, समग्र शिक्षा, कटिहार
सामान्य प्रश्न
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