Katihar News: चावल-दाल से लेकर तेल और मसालों तक बढ़े दाम
Katihar News: चावल-दाल से लेकर तेल और मसालों तक बढ़े दाम चावल-दाल से लेकर तेल और मसालों तक बढ़े दामचावल-दाल से लेकर तेल और मसालों तक बढ़े दामचावल-दाल से लेकर तेल और

Katihar News: कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। कटिहार में एक महीने के भीतर खाद्य सामग्री की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने आम परिवारों की रसोई का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। चावल, दाल, आटा, तेल, मसाले, चीनी और हरी सब्जियों के दाम बढ़ने से रसोई चलाना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। सबसे अधिक असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ा है, जिन्हें अब रोजमर्रा के खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। गृहिणियों का कहना है कि पहले जिस राशि में महीनेभर का राशन आ जाता था, अब उसी में आवश्यक सामान भी पूरा नहीं हो पा रहा है। चीनी और तेल ने बढ़ाया खर्च, मिठास हुई महंगी
आगामी कीमतें
पिछले पंद्रह दिनों में चीनी की कीमत 45-50 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65-70 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं गुड़ भी 55-60 रुपये से बढ़कर 75-80 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। सरसों तेल, जो एक महीने पहले 160 से 180 रुपये प्रति लीटर था, अब 200 से 235 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा है। रिफाइंड तेल में भी 30 से 40 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर घरेलू रसोई और मिठाई कारोबार दोनों पर पड़ा है।
महंगाई के प्रभाव
रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले चावल की लगभग सभी किस्मों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देहरादून बासमती 65 रुपये से बढ़कर 75 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि अन्य किस्मों में भी 3 से 10 रुपये तक की वृद्धि हुई है। आटा 35 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। चना, मसूर, अरहर और मूंग दाल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर परवल, फूलगोभी, साइजन, नेनुआ और झिगुनी जैसी सब्जियों के दाम 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
मसालों की महंगाई
जीरा, काली मिर्च, इलायची, लहसुन और सूखी मिर्च की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मसালা कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक पहले की तुलना में कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं। कई परिवारों ने तेल और मसालों का उपयोग सीमित कर दिया है, जिससे भोजन के स्वाद पर भी असर पड़ रहा है।
गृहिणियों की चिंता
गृहिणी सरिता देवी कहती हैं कि चीनी, तेल और सब्जियों की महंगाई ने घर का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अब बच्चों की पढ़ाई और बचत के लिए रखी राशि भी रसोई पर खर्च करनी पड़ रही है। वहीं मिठाई दुकानदारों और चाय विक्रेताओं ने भी बढ़ती लागत के कारण उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं।
अर्थशास्त्री डॉ. नवल किशोर का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई से परिवारों की क्रय शक्ति प्रभावित होती है। यदि आवश्यक वस्तुओं के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो उपभोक्ता खरीदारी में कटौती करेंगे, जिसका असर खुदरा कारोबार पर भी पड़ेगा। उनके अनुसार सबसे अधिक परेशानी गरीब और सीमित आय वाले परिवारों को होगी, क्योंकि उनकी बचत और मासिक बजट दोनों पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
कटिहार के बाजारों में बढ़ती महंगाई अब केवल रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आम लोगों की जीवनशैली और मासिक आर्थिक योजना को भी प्रभावित करने लगी है। ऐसे में हर बढ़ती कीमत के साथ लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।


