Katihar News: कोसी के मुहाने पर जिंदगी: 60 मीटर दूर मौत, फिर भी बेखबर सिस्टम
Katihar News: कोसी के मुहाने पर जिंदगी: 60 मीटर दूर मौत, फिर भी बेखबर सिस्टमकोसी के मुहाने पर जिंदगी: 60 मीटर दूर मौत, फिर भी बेखबर सिस्टमकोसी के मुहाने पर जिंदगी:

Katihar News: कटिहार, हिंदुस्तान प्रतिनिधि- कटिहार में नदियां अब सिर्फ पानी नहीं, बल्कि लोगों के सपने, आशियाने और पीढ़ियों की मेहनत भी बहा ले जा रही हैं। कोसी, गंगा और महानंदा तीनों नदियों का कटाव जिले के कई गांवों में तबाही का नया अध्याय लिख रहा है। कहीं गांव से महज कुछ मीटर दूर मौत दस्तक दे रही है, कहीं सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन और दर्जनों घर नदी में समा चुके हैं, तो कहीं हजारों लोग हर रात उजड़ने के डर के साए में जागकर गुजार रहे हैं। प्रशासन और कटावरोधी कार्यों के दावों के बीच ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं राहत पहुंचने से पहले उनकी पूरी दुनिया नदी की धार में न समा जाए। कोसी की गर्जना अब तीनघरिया और नवटोलिया के लोगों की नींद छीन चुकी है। जिस नदी ने पहले खेत निगले, अब वह गांव को अपने आगोश में लेने की दहलीज पर पहुंच गई है। कटाव स्थल से गांव की दूरी महज 60 से 80 मीटर बची है। करीब 15 हजार की आबादी हर दिन इस डर के साथ जी रही है कि अगली सुबह उनका घर-आंगन सुरक्षित रहेगा भी या नहीं।
एक पखवाड़े में 250 एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समाई
एक पखवाड़े के भीतर लगभग 250 एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है और ग्रामीणों का कहना है कि करीब सौ वर्ष पहले जहां कोसी की धारा बहती थी, नदी अब उसी पुराने रास्ते की ओर लौट रही है। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे जब हिन्दुस्तान की टीम कटाव स्थल पहुंची तो बाढ़ संघर्षात्मक कार्य के नाम पर केवल औपचारिकता नजर आई। मजदूर बोरी में मिट्टी और बालू भर रहे थे, लेकिन मौके पर न तो कोई अभियंता मौजूद था और न ही संवेदक। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति लापरवाही को उजागर करती है।
ग्रामीणों ने बताया दर्द
कटाव स्थल पर मौजूद तीनघरिया एवं नवटोलिया गांव के अशोक कुमार, ललन यादव, गोपाल प्रसाद यादव, बबलू साह, दिलखुश कुमार, गोपाल ठाकुर, लक्ष्मण पंडित, विशु साह, अर्जुन साहनी, टुनटुन मंडल सहित बसंती देवी, झालो देवी, गुड्डी देवी, सरिता देवी, मंजुला देवी, बागडो देवी, मीरा देवी, कल्पना देवी और रुको देवी की आंखों में अपने भविष्य की चिंता साफ दिखाई दी। ग्रामीणों ने कहा कि पहले खेती की जमीन नदी में समा गई, अब घर बचाने की बारी है। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों के भविष्य को लेकर पूरा गांव भय और असमंजस में है। उधर जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि सरकार ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए बकरी पालन से जोड़ा, लेकिन खेत कट जाने से बकरियों के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। आजीविका का सहारा भी अब संकट में पड़ गया है।
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी उपेक्षा का आरोप लगाया
उनका कहना था कि चुनाव के समय गांव तक पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि अब इस आपदा की घड़ी में नजर नहीं आ रहे हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद न तो स्थायी समाधान की दिशा में पहल हुई और न ही कटावरोधी कार्य में अपेक्षित तेजी दिखाई गई। लोगों का आरोप है कि यदि पिछले वर्ष पत्थर टोला के समीप बन रहे ठोकर को समय पर आगे बढ़ा दिया गया होता तो आज यह नौबत नहीं आती।
कुरसेला की अंचल पदाधिकारी अनुपम कुमारी ने बताया
कि प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया जा रहा है और संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो नियमानुसार राहत एवं पुनर्वास सहित आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल तीनघरिया और नवटोलिया के लोगों की निगाहें नदी पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर टिकी हैं, जिससे उन्हें उम्मीद है कि वह उनके आशियाने को कोसी की धार में समाने से पहले बचा लेगी।
गंगा के कटाव से धुरियाही पर संकट गहराया, डेढ़ सौ परिवार हुए बेघर
दो वर्षों से जारी कटाव से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में समाई, ग्रामीणों ने बचाव कार्य की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक उदासीनता पर उठाए सवाल
मनिहारी, निज संवाददाता
मनिहारी प्रखंड की धुरियाही पंचायत में गंगा नदी का कटाव लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। छह वार्डों और करीब 12 हजार की आबादी वाली इस पंचायत में पिछले दो वर्षों से जारी कटाव ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। वार्ड संख्या 4, 5 एवं 6 के बुढ़ियाटिक्कर, मरगाहा समेत कई इलाकों में प्रतिदिन उपजाऊ कृषि भूमि के साथ लोगों के घर भी गंगा में समा रहे हैं। अब तक सैकड़ों एकड़ खेती योग्य जमीन नदी में विलीन हो चुकी है, जबकि लगभग 150 परिवार बेघर होकर तंबू लगाकर जीवन-यापन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से इस वर्ष किया गया कटावरोधी कार्य नाकाफी साबित हो रहा है। मरगाहा के समीप करीब 200 मीटर क्षेत्र में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से जियो बैग बिछाए गए हैं, लेकिन यदि यह कार्य पहले बुढ़ियाटिक्कर क्षेत्र से शुरू किया गया होता तो कटाव को काफी हद तक रोका जा सकता था।
ग्रामीण हरदेव मंडल, ओमप्रकाश शर्मा, संजय यादव, बैजनाथ यादव, रामाशीष मंडल और अनुज यादव ने बताया
कि पंचायत के लोगों पर भारी संकट मंडरा रहा है। कटाव के डर से कई लोगों की तबीयत बिगड़ रही है और पूरा गांव रातभर जागकर भय के साये में समय बिता रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिल रहा है, जबकि प्रभावी कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने बताया
कि कटाव की गंभीर स्थिति के बावजूद बाढ़ नियंत्रण विभाग ने कुछ दिनों पहले फ्लड फाइटिंग के तहत चल रहा बांस रोल (बैंबू रोल) का कार्य भी बंद कर दिया تھا। बुधवार को जिला पदाधिकारी के निरीक्षण के दौरान अभियंताओं को तत्काल बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद गुरुवार से अभियंताओं की टीम कटाव स्थल की मापी कर रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कार्य की गति बेहद धीमी है और इससे लोगों की चिंता कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।
धुरियाही पंचायत के मुखिया राजकुमार मंडल ने बताया
कि अब तक करीब 150 परिवारों के घर गंगा में समा चुके हैं। सभी प्रभावित परिवार खुले स्थानों पर तंबू लगाकर रहने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि अब तक कटाव पीड़ितों को पुनर्वास के लिए सरकारी जमीन भी उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे उनके सामने जीवनयापन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
महानंदा का कटाव बना किसानों के लिए आफत उपजाऊ जमीन पर मंडराया अस्तित्व का संकट
आजमनगर घाट के दक्षिण मुख्य तटबंध के पास तेज कटाव जारी
पूर्व में हुआ बचाव कार्य ध्वस्त
समय पर पहल नहीं होने से किसानों में बढ़ी चिंता
आजमनगर, एक संवाददाता
प्रखंड क्षेत्र में महानंदा नदी का कटाव लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। नदी के तेज बहाव के कारण आजमनगर घाट से दक्षिण दिशा में मुख्य तटबंध से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि तेजी से महानंदा में समाती जा रही है। लगातार हो रहे कटाव और धंसान से क्षेत्र के कई किसान भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण महानंदा का जलस्तर बढ़ गया है
। इससे कटावग्रस्त क्षेत्र फिलहाल पानी में डूब गया है, लेकिन नदी के भीतर लगातार जमीन का कटाव जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन करीब पांच मीटर तक भूमि नदी में विलीन हो रही है, जिससे किसानों की वर्षों की मेहनत पलभर में बह रही है।
ग्रामीणों ने बताया
कि जिस स्थान पर लगभग एक वर्ष पहले कटावरोधी कार्य कराया गया था, वह पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जलस्तर बढ़ने से पहले विभाग की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया था, लेकिन बढ़ते पानी के कारण वह भी अधूरा रह गया। अब नदी के उफान के बीच बचाव कार्य कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।
किसानों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कटावरोधी उपाय किए गए होते तो आज यह स्थिति नहीं बनती
। पिछले वर्ष से ही ग्रामीण लगातार संबंधित विभाग से स्थायी सुरक्षा कार्य कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं की गई। परिणामस्वरूप अब उपजाऊ कृषि भूमि तेजी से नदी की धारा में समा रही है।
कटाव से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में भविष्य को लेकर गहरी चिंता है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और अधिक कृषि भूमि नदी में समा जाएगी, जिससे कई परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
कटाव स्थल का मुख्य पार्षद ने किया निरीक्षण
अविलंब कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग
कटिहार।
अमदाबाद नगर पंचायत के मायामारी गांव में पिछले कुछ दिनों से महानंदा नदी में लगातार हो रहे कटाव से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। कटाव धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। गुरुवार को नगर पंचायत के मुख्य पार्षद बबलू मंडल एवं पार्षद प्रतिनिधि संजार ने कटाव स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य पार्षद ने अनुमंडल पदाधिकारी मनिहारी से बातचीत कर अविलंब कटावरोधी कार्य शुरू कराने का आग्रह किया।मुख्य पार्षद बबलू मंडल ने कहा कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य शुरू नहीं कराया गया तोकटाव की स्थिति भयावह रूप ले सकती है।उन्होंने जिला पदाधिकारी कटिहार से भी शीघ्र कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की। इधर महानंदा नदी के कनीय अभियंता बिमल प्रसाद ने बताया कि गुरुवार को कटाव स्थल का निरीक्षण किया गया है। बताया शुक्रवार को वरीय अधिकारियों द्वारा स्थल का निरीक्षण किया जाएगा।उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान महानंदा नदी के जलस्तर में एक सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, गंगा नदी के कनीय अभियंता विश्व वल्लभ ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर में नौ सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाढ़ में डूबा शिकारपुर एवं बिधौर पंचायत, राहत के इंतजार में हजारों ग्रामीण
प्रशासन की अनदेखी पर फूटा गुस्सा, निजी नाव के सहारे चल रहा जीवन
पर्रामपुर, डेगरापारा और कुचियामोर के विद्यालय भी बाढ़ से प्रभावित, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
बारसोई निज प्रतिनिधि
बारसोई प्रखंड के शिकारपुर एवं बिधौर पंचायत अंतर्गत पर्रामपुर, डेगरापारा और कुचियामोर गांवों में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। गांवों में चारों ओर पानी फैल जाने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सड़क संपर्क टू्टने के कारण लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए निजी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाते हुए नाराज़गी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से राहत सामग्री, सरकारी नाव या अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यक कार्यों के लिए लोगों को निजी नाव किराये पर लेकर आना-जाना पड़ रहा है। बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पर्रामपुर, डेगरापारा और कुचियामोर के विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। स्कूल परिसर में पानी भर जाने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री का वितरण, सरकारी नाव की व्यवस्था, मेडिकल टीम की तैनाती तथा बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस संबंध में अंचल पदाधिकारी श्याम सुंदर साहा ने कहा कि हल्का कर्मचारी को निर्देश दिए गए हैं कि अपने क्षेत्र में बने रहे । तथा क्षेत्र का भ्रमणकर प्रतिदिन आकलन प्रतिवेदन देने का निर्देश दिए गए हैं। पर्याप्त मात्रा में नाव उपलब्ध है।


