डीजल की मार से महंगा हुआ ट्रांसपोर्ट, निर्माण सामग्री के दाम भी चढ़े
डीजल की मार से महंगा हुआ ट्रांसपोर्ट, निर्माण सामग्री के दाम भी चढ़े डीजल की मार से महंगा हुआ ट्रांसपोर्ट, निर्माण सामग्री के दाम भी चढ़ेडीजल की मार स

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों का असर अब सीधे बाजार और निर्माण कार्यों पर दिखने लगा है। डीजल महंगा होने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने ट्रक भाड़े में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी कर दी है। इसका असर माल ढुलाई से लेकर भवन निर्माण सामग्री और टाइल्स-सेनेटरी उत्पादों तक पर पड़ रहा है। कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने लगा है।
ट्रक भाड़े में वृद्धि
ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस की ओर से ट्रक भाड़े में प्रति किलोमीटर लगभग 10 रुपये तक की वृद्धि किए जाने के बाद लंबी दूरी के रूट सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कटिहार से सूरत जाने वाले ट्रकों का भाड़ा अब 20 से 22 हजार रुपये तक बढ़ गया है, जबकि दिल्ली रूट पर करीब 10 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ रही डीजल कीमतों के कारण पुराने भाड़े पर गाड़ियां चलाना घाटे का सौदा बन गया था।
ईंधन की कीमतों का प्रभाव
ट्रांसपोर्ट संघ से जुड़े मो. यूनुस ने बताया कि बीते एक सप्ताह में दो बार ईंधन कीमतों में वृद्धि हुई है। ऐसे में ट्रक मालिकों को गाड़ी संचालन, टोल टैक्स और मेंटेनेंस खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दिनों में डीजल की कीमतें और बढ़ीं तो माल ढुलाई दरों में फिर से संशोधन किया जा सकता है। फिलहाल पार्सल बुकिंग के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
निर्माण बाजार पर असर
भाड़े में बढ़ोतरी का असर अब निर्माण बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पीला बालू, सीमेंट, सरिया और गिट्टी जैसी सामग्री की कीमतों में तेजी आई है। पीला बालू, जो कुछ दिन पहले तक 57 रुपये प्रति घन फीट बिक रहा था, अब 66 रुपये प्रति घन फीट तक पहुंच गया है। निर्माण कार्य कराने वाले लोगों का बजट बिगड़ने लगा है।
टाइल्स और सेनेटरी उत्पादों की कीमतें
इधर, टाइल्स और सेनेटरी उत्पादों की कीमतों में भी 10 से 15 फीसदी तक उछाल आया है। पहले 600 रुपये में मिलने वाली टाइल्स की पेटी अब 700 रुपये तक पहुंच गई है। कारोबारियों के अनुसार प्रोपेन गैस की किल्लत के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे कंपनियों ने कई बार कीमतें बढ़ाई हैं। सेनेटरी उत्पादों पर भी 10 से 20 फीसदी तक अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में स्थिरता नहीं आई तो आने वाले दिनों में रोजमर्रा के अन्य सामान भी महंगे हो सकते हैं।
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