संशोधित--अखंड सौभाग्य की कामना के साथ 16 मई को मनाया जाएगा वट सावित्री व्रत
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कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि जिले में सुहागिन महिलाओं के आस्था और अखंड सौभाग्य के प्रतीक वट सावित्री व्रत को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 16 मई शनिवार को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर शहर से लेकर गांव तक धार्मिक माहौल बनने लगा है। बाजारों में खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है, वहीं घरों में पूजा की तैयारी शुरू हो गई है। पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ रखा जाने वाला यह व्रत जिले की महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। ज्येष्ठ अमावस्या पर मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएं निर्जला उपवास रखकर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और वट वृक्ष की परिक्रमा कर अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं।
बाजारों में दिखने लगा पर्व का रौनक
शहर के न्यू मार्केट, बड़ा बाजार, मिरचाईबाड़ी चौक और आसपास के बाजारों में इन दिनों पर्व की रौनक साफ दिख रही है। दुकानों में बांस से बने पंखे, डलिया, लाल धागा, पूजा सामग्री, कपड़े से बनी सत्यवान-सावित्री की प्रतिमाएं और श्रृंगार की वस्तुएं सज चुकी हैं। चूड़ी, साड़ी और सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ बढ़ गई है। खासकर नवविवाहित महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मेहंदी कलाकारों और ब्यूटी पार्लरों में भी बुकिंग शुरू हो गई है। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार की तैयारी में जुटी हैं। कई महिलाओं ने पहले से ही मेहंदी लगाने के लिए समय तय करा लिया है।
श्ुभ संयोग में पड़ रहा है इस बार पर्व
आचार्य अंजनी कुमार ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष वट सावित्री व्रत अत्यंत शुभ संयोग में पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस दिन शनि जयंती के साथ सौभाग्य योग और शोभन योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही बुधादित्य योग, नवपंचम योग, विपरीत राजयोग और गजलक्ष्मी राजयोग जैसे कई शुभ संयोग इस पर्व के महत्व को और बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और प्रेम के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। यही कारण है कि यह पर्व आज भी भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
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