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24 सितम्बर, 2020|5:05|IST

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कोरोना को ले दूध उत्पादकों पर पड़ रहा है असर

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विगत पांच माह से कोरोना संक्रमण एवं उसके बाद बाढ़ की त्रासदी झेलने के लिए विवश है जिले के पशुपालक। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर सरकार द्वारा लगाये गये लॉकडाउन के कारण यात्री बस एवं ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया।

जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र से दूध व्यवसाय से जुड़े लोगों को उत्पादित दूध को जिला मुख्यालय सहित दूसरे जिले में ले जाने में काफी मुश्किलें बढ़ गई। बताते चलें कि जिले में लगभग 25 हजार से अधिक दुधारु पशुओं का पालन पशुपालक करते हैं। खेतीबारी के साथ-साथ पशुओं से उत्पादित दूध की बिक्री करके अपने जीवकोपार्जन करते हैं। कोरोना काल में सबसे अधिक परेशानी पशुपालकों को झेलनी पड़ी। बताया जाता है कि लॉकडाउन के कारण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के होटल, नास्ता दुकान के अलावा चाय की दुकानें बंद रही। जिसके कारण प्रतिदिन इन दुकानों में दूध की आपूर्ति करनेवाले दुधिया एवं पशुपालकों के समक्ष उत्पादित दूध बेचने के लिए परेशानी हुई। इस दौरान पशुपालक अपने दूध से घी एवं पनीर बनाकर गांव-गांव घूमकर बेच रहे थे। जिस कारण न केवल उसे उचित मूल्य मिल रहा था जिस कारण औने पौने दाम में बेचकर पूंजी का उठाव कर रहे थे। साथ ही ऐसे समय में पशुओं के लिए चारा सहित भोजन सामग्री की व्यवस्था करना उसके लिए चुनौती बन गई है।

पशुपालकों ने बतायी अपनी पीड़ा: पशुपालन एवं दूध के व्यवसाय से जुड़े गोबराही दियारा के बबलू यादव, रामेश्वर यादव, शेरमारी के रतन मंडल, तिनघरिया के लक्ष्मी यादव, रंगरा के जितिलेश यादव, मुकेश यादव, मनोज यादव, बल्थी महेशपुर के झपटलाल यादव, दिनेश यादव तथा चमरु मंडल ने बताया कि प्रत्येक दुधिया द्वारा प्रतिदिन एक-एक क्विन्टल दूध गांव से खरीदासरी कर शहर ले जाते थे। लॉकडाउन के कारण उसके रोजगार पर संकट पड़ गया है। वहीं भैसान के यहां अग्रिम रुप में लाखो रुपये जमा है। दूध नहीं बिकने की स्थिति में उसका पनीर एवं घी बनाकर गांव-गांव घूमकर बेचने के लिए विवश है। वहीं होटल मालिक के यहां फंसा हुआ राशि नहीं मिलने के कारण आर्थिक रुप से परेशान हो रहे हैं। इन पशुपालकों ने बताया कि यातायात सुविधा बहाल नहीं हुआ तो पशुओं को बेचने की विवशता बन जायेगी।

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  • Web Title:Milk producers are affected by Corona