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28 अक्तूबर, 2020|5:49|IST

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मलेरिया विभाग : जर्जर भवन में रहने को विवश हैं अधिकारी और कर्मचारी

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मलेरिया विभाग कार्यालय भवन जर्जर रहने से कार्यरत कर्मी इन दिनों दहशत में है। कब किसके माथे पर छत का प्लास्टर टूट कर गिर जाये इसकी आशंका हमेशा बनी रहती है।

चार माह पूर्व भवन की जर्जरता को देखते हुए डीएम ने सिविल सर्जन को कार्यालय बदलने का आदेश दिया था। लेकिन वह आदेश कोरा साबित हो रहा है। जिससे स्वास्थ्य कर्मियों में भय का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में मलेरिया, फलेरिया, कालाजार जैसे जानलेवा घातक कीट जनित रोगों से जिला वासियों को बचाने के लिए कार्यरत मलेरिया विभाग के पदाधिकारी व कर्मी खुद परेशान हैं। भवन की दीवारें पूरी तरह से जर्जर है। इसी कार्यालय में जान जोखिम में डालकर मलेरिया विभाग के कर्मचारी व अधिकारी प्रतिदिन काम करते हैं। कमरों के जर्जर रहने के कारण विभागीय कागजात, उपस्कर, दवा व कीटनाशक छिड़काव के लिए सरकार की ओर से लाखों रुपये के उपकरण को भी अभियान के बाद जंग खाते रहते हैं। विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया है कि चार माह पूर्व जिला पदाधिकारी कंवल तनुज सदर अस्पताल पहुंच कर उक्त जर्जर भवन को देखकर हतप्रभ थे। उनके द्वारा सिविल सर्जन को एक सप्ताह पंद्रह दिनों के अंदर मलेरिया विभाग के कार्यालय को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने का आदेश बेअसर साबित हुआ। आज तक सिविल सर्जन और स्वास्थ्य समिति के सदस्य की लापरवाही के कारण कर्मी जान जोखिम में डाल कार्य करने को विवश हैं।

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  • Web Title:Malaria Department Officers and employees are forced to live in a dilapidated building