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4 दिसंबर, 2020|4:13|IST

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कटिहार: 36 में से 30 एम्बुलेंस चलने लायक नहीं

कटिहार: 36 में से 30 एम्बुलेंस चलने लायक नहीं

जिले में 36 सरकारी एंबुलेंसों में से 30 की स्थिति ठीक नहीं है। एंबुलेंस की यांत्रिक स्थिति खराब रहने से रोगियों को एंबुलेंस में चढ़ाकर सदर अस्पताल व अन्य संबंधित अस्पताल ले जाते समय चालकों की मानसिक स्थित अच्छी नहीं रहती है।

चालकों को इस बात का चिंता सताने लगती है कि न जाने कब एंबुलेंस रास्ते में खराब हो जाए और रोगियों को किसी निजी वाहन या फिर किसी दूसरे एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाना पड़े। सरकारी एंबुलेंस के चालक ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि जिले में 30 पुरानी और छह नई एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। इसमें 30 एंबुलेंस की हालत कमोवेश अच्छी नहीं है। छह की हालत ठीक है लेकिन उन एंबुलेंस की निरंतर सेवा लेने से हालत उनकी खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि बारसोई से सदर अस्पताल रोगियों को पहुंचाने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता था। एंबुलेंस के खराब रहने के कारण इन दिनों तीन से चार घंटे का समय लगता है। इस कारण रोगियों के परिजनों की शिकायत सुननी पड़ती है। इसके साथ ही समय पर रोगियों को संबंधित अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने संबंधित कार्य एजेंसी को एंबुलेंस को मरम्मत कराने के लिए कई बार शिकायत की गई है लेकिन उनकी ओर से ध्यान नही दिया जाता है। इस कारण से जिले के अमदाबाद, मनिहारी, बारसोई, आजमनगर, प्राणपुर, बलरामपुर, कोढ़ा, फलका, समेली, बरारी, कुर्सेला, हसनगंज, डंडखोरा आदि प्रखंडों से रोगियों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में काफी परेशानी हो रही है। सरकारी एंबुलेंस की स्थिति सही नहीं रहने से लोग निजी खर्च पर एंबुलेंस व अन्य वाहन कर रोगी सदर अस्पताल व केएमसीएच पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे अधिक परेशानी प्रसुताओं को होती है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार की प्रसूता समय पर पहुंचने के लिए पैसे खर्च कर निजी एंबुलेंस और ऑटो को भाड़े पर कर अस्पताल पहुंचने को विवश हैं। जिन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। वे लोग जर्जर एंबुलेंस के सहारे ही अस्पताल पहुंचने को विवश हैं। निजी एंबुलेंस संचालकों द्वारा बारसोई से सदर अस्पताल पहुंचने में तीन हजार रुपये की मांग की जाती है जबकि सरकारी दर एक हजार रुपये से भी कम है। सदर अस्पताल से केएमसीएच गंभीर रूप से बीमार रोगियों को पहुंचाने के लिए निजी एंबुलेंस संचालक आठ सौ रुपये लेते हैं। वहीं सरकारी एंबुलेंस की दर 120 रुपये है। रोगियों के परिजनों ने संतोष कुमार, प्रमोद रविदास, उमेश कुमार आदि के परिजनों ने बताया कि सरकारी एंबुलेंस की स्थिति ठीक नहीं है। अंदर और बाहर दोनों की हालत ठीक नहीं है। चालक के साथ-साथ रोगियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

शव वाहन भी 15 दिनों से खराब: सदर अस्पताल परिसर में 15 दिनों से शव वाहन खराब है। जिसे सदर अस्पताल में शोभा की वस्तु बनाकर रखा गया है। शव वाहन खराब रहने से इलाज के क्रम में मौत होने के बाद मृतक के परिजनों को सरकारी शव वाहन का लाभ नहीं मिल पाता है। परिजनों को निजी खर्च पर निजी एंबुलेंस को भाड़े पर करना पड़ता है। इससे उनका पैसा अधिक लगता है। इससे परेशानी होती है।

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  • Web Title:Katihar 30 out of 36 ambulances are not operational