फास्ट ट्रैक पर असम: प्रगति के एक नए युग की शुरूआत कर रहा रेल बजट

Jan 13, 2026 12:27 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कटिहार
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95 प्रतिशत बिजलीकरण कार्य हो गया पूरा95 प्रतिशत बिजलीकरण कार्य हो गया पूरा95 प्रतिशत बिजलीकरण कार्य हो गया पूरा95 प्रतिशत बिजलीकरण कार्य हो गया पूरा95

फास्ट ट्रैक पर असम: प्रगति के एक नए युग की शुरूआत कर रहा रेल बजट

कटिहार, एक संवाददाता भारतीय रेल लगातार निवेश, आधुनिक तकनीक और यात्री-केंद्रित अप्रोच के माध्यम से असम के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक विस्तृत बदलाव ला रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, असम में रेल विकास को समावेशी विकास, क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक प्रगति के मुख्य संचालक के रूप में उच्च प्राथमिकता दी गई है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि वर्ष 2014 से इस केंद्रित प्रयास का असर रेल नेटवर्क के विस्तार, बिजलीकरण, स्टेशनों के पुनर्विकास, संरक्षा पहलों और यात्री सुविधाओं में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि असम में रेल नेटवर्क के विस्तार ने उल्लेखनीय रफ्तार पकड़ी है।

पिछले पांच सालों में 416 किलोमीटर नई रेल लाइन बनाई गई है। इसमें 2021 में पूरी हुई बिलासीपारा और अभयापुरी के बीच 50 किलोमीटर नई लाइन शामिल है। इसके साथ ही 366 किलोमीटर दोहरीकरण का कार्य भी हुआ है, जिससे लाइन की क्षमता और परिचालन दक्षता में काफी सुधार हुआ है। फिलहाल, असम के रेल नेटवर्क में 2,571 रूट किलोमीटर और 4,199 ट्रैक किलोमीटर शामिल हैं, जिससे राज्य के प्रमुख आर्थिक केंद्रों, शहरी क्षेत्रों और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी मज़बूत हुई है। 95 प्रतिशत बिजलीकरण कार्य हो गया पूरा बिजलीकरण असम के रेल विकास में एक बड़ा माइलस्टोन साबित हुआ है। लगभग 95 प्रतिशत बिजलीकरण पहले ही पूरा हो चुका है, जिसमें 2,456 रूट किलोमीटर शामिल हैं, और शेष 116 रूट किलोमीटर भी जल्द ही पूरे होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप, डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस और डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें अब इंड टू इंड इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चल रही हैं, जिससे यात्राएं ज़्यादा स्वच्छ, तेज़ और ऊर्जा-कुशल हो रही हैं। हयबरगांव स्टेशन पर पहला अमृत भारत स्टेशन बड़े पैमाने पर स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों का अनुभव काफी बेहतर हो रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत असम में कुल 50 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। मई 2025 में उद्घाटन किया गया हयबरगांव स्टेशन, राज्य का पहला अमृत स्टेशन बन गया है, जिसमें आधुनिक आर्किटेक्चर, उन्नत प्रतीक्षालय, बेहतर सुविधाएं और दिव्यांगों के अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं। एनएफआर में स्टेशनों पर 46 लिफ्ट, 33 एस्केलेटर और असम के 218 स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधाओं की स्थापना से यात्रियों की सुविधाएं और भी बेहतर हुई है। गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत के साथ असम भी भारत के सेमी-हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। साथ ही, जल्द ही माननीय प्रधानमंत्री असम राज्य और इस क्षेत्र को पहली स्लीपर क्लास वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात देंगे, जो कामाख्या (असम) और कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के बीच चलेगी। इसके साथ ही, असम के लिए डिब्रूगढ़-गोमतीनगर और कामाख्या-रोहतक के बीच पहली दो अमृत भारत नॉन-एसी ट्रेनें भी शुरू की जाएंगी। 28 से ज्यादा बनाया गया रोड ओवर ब्रिज सीपीआरओ ने बताया कि संरक्षा और स्थिरता पहलों में 28 से ज़्यादा रोड ओवरब्रिज और 270 रोड अंडरब्रिज का निर्माण, 152 समपार फाटकों को बंद करना और हाथियों की सुरक्षा के लिए भारत का पहला एआई-आधारित इंट्रुज़न डिटेक्शन सिस्टम की स्थापना करना शामिल है। न्यू तिनसुकिया में रेलवे हेरिटेज पार्क और म्यूज़ियम के माध्यम से रेल विरासत संरक्षण को मज़बूत किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं शुरू किए गए हैं, जिनमें लामडिंग-डिब्रूगढ़ दोहरीकरण, नया सराईघाट रेल-सह-रोड ब्रिज को 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। आजरा और कामाख्या के बीच एक एलिवेटेड कॉरिडोर, कामाख्या और न्यू गुवाहाटी के बीच तीसरी लाइन की मंजूरी मिल गई है। भारत से भूटान के बीच मिल चुकी है नई रेल लाइन की मंजूरी सीपीआरओ ने बताया कि सितंबर 2025 में 69 कि.मी. कोकराझार-गेलेफू (भूटान) नई लाइन की मंज़ूरी शामिल हैं। अन्य पहलों में पांच गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, 50 स्टेशनों पर 1,052 एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाना, और ड्रोन-आधारित सफाई एवं अंडरवाटर रोबोटिक ब्रिज इंस्पेक्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीक को शुरू करना शामिल है। ये विकास माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न से अनुरूप हैं, जिन्होंने निरंतर कनेक्टिविटी को समावेशी विकास की रीढ़ बताया है। देश के बाकी हिस्सों के साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए पूर्वोत्तर को जोड़ने पर उनका फोकस रेल बजट में प्रत्यक्ष दिखता है।

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