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13 अगस्त, 2020|11:36|IST

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बाढ़ आते ही मजदूरों का पलायान हुआ तेज

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कोरोना काल में बाढ़ आते ही फिर से मजदूरों का पलायन तेज हो गया है। हर दिन सैकड़ों की संख्या में दूसरे राज्य में मजदूरी करने के लिए जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंच रहे हैं।

बुधवार को कोढ़ा के गेड़ाबाड़ी, कोलासी, कदवा के सोनौली, आजमनगर, डंडखोरा, बारसोई के करीब दो सौ से अधिक श्रमिक कविगुरु एक्सप्रेस ट्रेन से पंजाब रवाना हुए। जब उनसे पूछा गया कि कोरोना काल में लॉकडाउन के समय जब आप लोग पंजाब, हरियाणा से अपने घर वापस आ गये हैं। ऐसे क्या परेशानी हो गई कि अब मजदूरी करने के लिए वापस जा रहे हैं। इतना सुनते ही मजदूरों में मो. तनवीर आलम, अमरजीत पासवान, शंकर साह, मो. फिरोज, रामसुदन पासवान, अशोक राम, पप्पू कुमार, राजा पासवान, दीपक पासवान, रंजीत कुमार, गंगा प्रसाद दास, रामकुमार मंडल आदि ने बताया कि आज के जमाने में पैसा से जीवन चलता है। कोरोना के शुरूआती दौर में लॉकडाउन हो गया तो उनके पास पैसा खत्म हो गया था। कोरोना का डर बना हुआ था। स्थानीय प्रशासन भी घर जाने के लिए दबाब डाल रहे थे। ऐसे में घर आने के अलावा कोई चारा नहीं बच गया था। घर पहुंचा तो कुछ दिन जीवन किसी तरह से गुजार दिया। मुख्यमंत्री हमलोगों के लिए कुछ न कुछ रोजगार का साधन उपलब्ध करवा देंगे। मगर दो महीनों होने चला। कुछ दिन रोजगार मिला। एक दिन में 350 रुपये काम का दे रहा था। भला इतने रूपये में आठ से दस लोगों का जीवन कैसे गुजार सकते हैं। अब तो कोई रोजगार यहां पर नहीं मिल पा रहा है। महानंदा, रीगा नदी का पानी भी तबाही मचाने लगा है। आखिर इस समय में बिना रोजगार के अपना व बच्चों का जीवन कैसे यहां रहकर पालेंगे। जीवन जीने के लिए पैसा चाहिए। जो उनके पास नहीं है। पंजाब, हरियाणा, गुजरात से फोन आ रहा है। काम पर लौट जाओ। दोगुणा मजदूरी देने, आने का भाड़ा भी देने की बात मालिक फोन पर कह रहे हैं। यहां रोजगार व पैसा देने वाला कोई नहीं है। वहां मजदूरी के लिए बुलाया जा रहा है। ऐसे में घर पर रहकर क्या करें। इसलिए कमाने के लिए बाहर जा रहे हैं। यह पूछने पर कि क्या दोबारा लॉकडाउन हुआ तो घर वापस आयेंगे। इसके जबाब में मजदूरों ने कहा कि कुछ भी हो जाए अब घर नहीं वापस आयेंगे।

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  • Web Title:Exodus of laborers intensified as soon as the flood