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विद्यालय बदला, पर डेटा इंपोर्ट न होने से छात्र सिस्टम से बाहर

विद्यालय बदला, पर डेटा इंपोर्ट न होने से छात्र सिस्टम से बाहर

संक्षेप:

कटिहार जिले में सात महीने बाद भी बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से बाहर हैं। यू-डायस प्लस रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लगभग 12.48 लाख बच्चे ऐसे हैं जिनका नया नामांकन नहीं हुआ है। प्रवासी मजदूर परिवारों के बच्चे अक्सर मध्य सत्र में स्कूल बदलते हैं, जिससे उनकी सूची में नामांकन नहीं हो पाता।

Nov 27, 2025 12:42 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कटिहार
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कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। राज्य की तरह कटिहार जिले में भी शैक्षणिक सत्र शुरू हुए सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन यू-डायस प्लस रिपोर्ट में अब भी बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से बाहर की श्रेणी में दर्ज हैं। जिले के कई विद्यालयों में वह बच्चे सूचीबद्ध हैं, जिन्होंने एक स्कूल छोड़ा, पर दूसरे में उनका नामांकन अपडेट नहीं हुआ। ऐसे प्रकरण खासकर उन परिवारों में अधिक हैं, जो मजदूरी या आजीविका के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं। यू-डायस प्लस की 25 नवंबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे बिहार में करीब 12.48 लाख बच्चे ऐसे हैं जिनका नया नामांकन दर्ज नहीं हो पाया है, जबकि इनका रिकॉर्ड सिस्टम में पहले से मौजूद है।

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यू-डायस के नियम के मुताबिक, जब छात्र स्कूल बदलते हैं-विशेषकर छठी, नौवीं और 11वीं में-तो नए विद्यालय को ड्रॉपबॉक्स से उनका डेटा इंपोर्ट करना अनिवार्य होता है। क्या है यू-डायस ड्रॉपबॉक्स ड्रॉपबॉक्स एक डिजिटल पूल है, जिसमें वे छात्र अस्थायी रूप से सूचीबद्ध होते हैं, जिन्होंने पुराना स्कूल तो छोड़ दिया है, लेकिन नए स्कूल ने उन्हें अपने नामांकन रजिस्टर में शामिल नहीं किया है। डेटा इंपोर्ट होते ही छात्र पुन: पूरी तरह सिस्टम का हिस्सा मान लिए जाते हैं। हालांकि, सात महीने बाद भी कई छात्र ड्रॉपबॉक्स में ही अटके हुए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि वे सिस्टम में ‘स्कूल से बाहर’ माने जा रहे हैं, जबकि वे अधिकांशत: ऐसे बच्चे हैं जो बीच सत्र में विद्यालय बदलते हैं या जिनके परिवार दूसरे जिलों व राज्यों में काम के कारण लगातार स्थानांतरित होते रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में है ऐसी स्थिति कटिहार के ग्रामीण इलाकों में भी ऐसी स्थिति बड़ी संख्या में देखी जा रही है, जहां प्रवासी मजदूर परिवारों के बच्चे अक्सर मध्य सत्र में स्कूल बदलते हैं। समय पर नामांकन न होने से वे यू-डायस सूची में बाहर के तौर पर दर्ज हो जाते हैं। वर्जन यू-डायस ड्रॉपबॉक्स में फंसे छात्रों को जल्द से जल्द नए स्कूलों में इंपोर्ट करने का निर्देश सभी प्रधानाध्यापकों को दिया गया है। कुछ मामलों में माता-पिता के स्थानांतरण या दस्तावेजों के समय पर उपलब्ध न होने की वजह से देरी हुई है। सभी विद्यालयों से कहा गया है कि दिसंबर तक ड्रॉपबॉक्स में दर्ज सभी बच्चों का नामांकन प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। किसी भी बच्चे को ‘स्कूल से बाहर’ नहीं रहने दिया जाएगा।-पंकज कुमार, डीपीओ, समग्र शिक्षा, कटिहार