किसानों की डिजिटल पहचान का काम शुरू
कटिहार जिला प्रशासन ने एग्री स्टैक परियोजना के तहत किसानों की डिजिटल पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान जिला पदाधिकारी ने किसानों के पंजीकरण के लिए विशेष कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। एग्री स्टैक परियोजना के तहत किसानों की डिजिटल पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में कटिहार जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी क्रम में शुक्रवार को विकास भवन के सभाकक्ष में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त अमित कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी प्रद्युम्न सिंह यादव सहित जिला व प्रखंड स्तर के कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मी मौजूद रहे। प्रशिक्षण सत्र में जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने उपस्थित सभी वरीय पदाधिकारियों और कर्मियों का स्वागत करते हुए बताया कि प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार सरकार के निर्देशानुसार एग्री स्टैक परियोजना के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री को मिशन मोड में पूरा किया जाना है।
इसका उद्देश्य जिले के प्रत्येक किसान का फार्मर आईडी तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ देना है। सभी पंचायतों में दो चरणों लगेगा विशेष कैंप उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री के लिए जिले की सभी पंचायतों में दो चरणों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। पहले चरण में 6 से 9 जनवरी 2026 और दूसरे चरण में 18 से 21 जनवरी 2026 तक पंचायत स्तर पर कैंप आयोजित होंगे। इन कैंपों में कृषि विभाग के कर्मियों के साथ-साथ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पदाधिकारी और कर्मचारी संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। राजस्व कर्मचारी व कृषिकर्मी करेंगे समन्वय जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में सभी राजस्व कर्मचारियों और कृषि कर्मियों को आपसी समन्वय स्थापित कर निर्धारित तिथियों में अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री के दौरान आने वाले भूमि संबंधी दावों और विवादों का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए प्रखंड स्तरीय कार्यान्वयन दल, अंचलाधिकारी और संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। प्रशासन ने पंचायत स्तरीय कर्मियों को कैंप की तिथियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का भी निर्देश दिया है, ताकि अधिक से अधिक किसान कैंप में पहुंचकर अपना पंजीकरण करा सकें। अधिकारियों का मानना है कि फार्मर रजिस्ट्री पूरी होने के बाद किसानों की योजनाओं में सहभागिता बढ़ेगी और कृषि से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।

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