राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में 83.5 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त

Feb 17, 2026 12:20 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कटिहार
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कटिहार जिले में जनवरी 2026 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। 21,639 बच्चों की जांच की गई, जिसमें 3,427 बच्चों में स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं। गंभीर मामलों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया। फरवरी में बाकी बच्चों की जांच पूरी कर शत-प्रतिशत उपलब्धि का लक्ष्य है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में 83.5 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त

कटिहार, एक संवाददाता। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनवरी 2026 में कटिहार जिले के सभी प्रखंडों में व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। जिले की 21 चलंत स्वास्थ्य टीमों ने आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पहुंचकर 9,312 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की। वार्षिक लक्ष्य 25,920 के विरुद्ध अब तक 21,639 बच्चों तक पहुंच बनाते हुए 83.5 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई। स्वास्थ्य समिति के एक रिपोर्ट के अनुसार आजमनगर, प्राणपुर और कदवा प्रखंड ने शत-प्रतिशत से अधिक लक्ष्य प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि मनिहारी की टीम केवल 45 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर सकी।

आजमनगर में 214 आंगनबाड़ी केंद्र एवं 2 विद्यालयों में 1,366 बच्चों की जांच हुई। अमदाबाद में 459, बलरामपुर में 575, बरारी में 439, बारसोई में 738, डंडखोरा में 719, फलका में 604, हसनगंज में 975, कदवा में 823, कोढ़ा में 699, कुर्सेला में 449, मनिहारी में 344, मनसाही में 759, प्राणपुर में 633, समेली में 429 तथा सदर प्रखंड में 929 बच्चों की जांच की गई। जांच के दौरान कुल 3,427 बच्चों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं। इनमें लगभग 250 बच्चों में बीमारियां, 100 से 150 बच्चों में पोषण संबंधी कमियां तथा कई बच्चों में जन्मजात दोष पाए गए। चार हृदय रोग से ग्रसित तथा छह क्लब फुट और तंत्रिका नलिका दोष से पीड़ित बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया। गंभीर मामलों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना, जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल भागलपुर तथा इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में निःशुल्क उपचार हेतु भेजा गया है। 22 फरवरी को भागलपुर चिकित्सा महाविद्यालय में हृदय रोग से ग्रसित बच्चों के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित किया जाएगा। टीमों ने जन्मजात हृदय रोग, कटे होंठ एवं तालु, रक्ताल्पता, विटामिन की कमी, त्वचा रोग, दांतों की समस्याएं, सुनने व देखने में असमर्थता तथा विकास में देरी की जांच की। आवश्यकता पड़ने पर मौके पर ही दवा उपलब्ध कराई गई और जटिल मामलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा सदर अस्पताल भेजा गया। प्रत्येक चलंत टीम में दो चिकित्सक (एक पुरुष, एक महिला), एक सहायक नर्स प्रसूति कर्मी तथा एक औषधि सहायक शामिल हैं। सिविल सर्जन एवं जिला स्वास्थ्य समिति की नियमित निगरानी से अभियान को गति मिली है। फरवरी माह में शेष बच्चों की जांच पूरी कर शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

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