
ठंड की मार से दलहन-तिलहन व सब्जियों पर संकट
कटिहार जिले में ठंड की लगातार बढ़ती स्थिति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। न्यूनतम तापमान में गिरावट से दलहन और तिलहन फसलों पर पाले का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड से फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। गेहूं के किसानों में ठंड को लेकर उत्साह है क्योंकि यह उनकी फसल के लिए अनुकूल है।
कटिहार हिन्दुस्तान, प्रतिनिधि। कटिहार जिले में लगातार बढ़ती ठंड ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बीते कुछ दिनों से न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे खेतों में खड़ी दलहन, तिलहन और सब्जी फसलों पर पाले का खतरा मंडराने लगा है। खासकर नाजुक फसलों को लेकर किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि ठंड का यही सिलसिला जारी रहा तो फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहन और तिलहन की फसलें ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। चना, मसूर, अरहर और सरसों जैसी फसलें यदि अत्यधिक ठंड या पाले की चपेट में आती हैं तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है।
पत्तियां झुलसने लगती हैं, फूल और फल गिरने की संभावना बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। यही वजह है कि इन फसलों की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है। इधर, सब्जी उत्पादक किसान भी ठंड को लेकर सतर्क हैं। टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, मटर और आलू जैसी फसलें इस समय खेतों में अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन पाला पड़ने की स्थिति में इन्हें भारी नुकसान हो सकता है। खासकर आलू की फसल पर पाले का असर ज्यादा पड़ता है। पाला लगने से पौधे झुलस जाते हैं, जिससे कंदों का विकास रुक सकता है और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। किसानों का कहना है कि समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए गए तो नुकसान तय है। अत्यधिक सिंचाई भी बन सकती है नुकसान की वजह कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के समय फसलों की सिंचाई संतुलित तरीके से करनी चाहिए। हल्की सिंचाई से खेतों में नमी बनी रहती है, जिससे पाले के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। वहीं अत्यधिक सिंचाई फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ज्यादा पानी से जड़ सड़ने की आशंका बढ़ जाती है और पौधों में रोग लगने का खतरा रहता है। इसके साथ ही किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह दी गई है। पाले की संभावना होने पर खेतों में धुआं करने या मेड़ों पर सूखी घास जलाकर तापमान बढ़ाने जैसे पारंपरिक उपाय अपनाने को कहा गया है, ताकि फसलों को ठंड से बचाया जा सके। गेहूं किसानों में खुशी का माहौल हालांकि बढ़ती ठंड से गेहूं की खेती करने वाले किसानों में उत्साह का माहौल है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गेहूं की फसल के लिए ठंडा मौसम अनुकूल माना जाता है। ठंड बढ़ने से गेहूं के पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और दानों का भराव अच्छा होता है। यदि अत्यधिक पाला न पड़े और मौसम सामान्य बना रहे, तो इस बार गेहूं की पैदावार अच्छी होने की संभावना है। यही कारण है कि गेहूं उत्पादक किसान ठंड को लेकर चिंतित नहीं हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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