कश्मीर और हिमाचल वाले फल अब नालंदा में, हरमन-99 'सेब' की पैदावार देख BAU के VC गदगद
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने नूरसराय स्थित नालंदा उद्यान महाविद्यालय का दौरा किया। यहां के परिसर में हरमन-99 प्रजाति के 40 पेड़ों पर लदे सेब देखकर वे गदगद हो गए।

Apple farming in Bihar: अक्सर लोगों को लगता है कि सेब की खेती सिर्फ कश्मीर या हिमाचल की ठंडी वादियों में ही हो सकती है। लेकिन, बिहार के नालंदा के कृषि वैज्ञानिकों ने इस मिथक को तोड़ दिया है। बुधवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने नूरसराय स्थित नालंदा उद्यान महाविद्यालय का दौरा किया। यहां के परिसर में हरमन-99 प्रजाति के 40 पेड़ों पर लदे सेब देखकर वे गदगद हो गए। उन्होंने कहा कि नालंदा की जलवायु सेब की सघन बागवानी के लिए पूरी तरह मुफीद है।आने वाले समय में इसका खेतों तक विस्तार कॉमर्सियल फसल उत्पाद के रुप में सेब उगाने की संभावना पर काम किया जाएगा।
कमल और सिंघाड़े पर भी बड़ा काम
कुलपति डॉ. सिंह ने कॉलेज में चल रहे शोध कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिक डॉ. करनजीव पिछले दो सालों से सिंघाड़ा (पानी फल) की उन्नत खेती पर शोध कर रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही इस महाविद्यालय में ‘कमल’ का एक विशेष शोध केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, विश्वविद्यालय स्तर पर ब्लू बेरी की खेती पर रिसर्च जारी है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय खेती को उत्पादक और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम करती है।
मकोय का मिलेगा नया अवतार
निरीक्षण के दौरान कुलपति ने कृषि वैज्ञानिकों को कैप गूजबेरी (मकोय) की नई और उन्नत प्रजाति विकसित करने का विशेष टास्क दिया। ताकि, किसानों को व्यावसायिक खेती का एक और नया विकल्प मिल सके। मौके पर डॉ. विनोद कुमार, डॉ. विजय कुमार, डॉ. संतोष कुमार चौधरी समेत कई वैज्ञानिक मौजूद थे।
कैसे होती है हरमन-99 सेब की खेती
फल वैज्ञानिक डॉ. दिव्या तिवारी, डॉ. नेहा सिन्हा, डॉ. मधुमाला और ध्यान नंदा ने गर्म जलवायु वाले सेब की खासियत बताई। वैज्ञानिकों ने कहा कि इसके लिए दोमट बलुआही मिट्टी सबसे उपयुक्त है। खासियत यह कि इसमें नए कल्ले (टहनियों) पर ही फूल लगते हैं, जिससे सघन बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। पौधे लगाने का सही समय दिसंबर से जनवरी के बीच होता है। फरवरी महीने में पेड़ों पर फूल (मंजर) आना शुरू हो जाते हैं। मार्च-अप्रैल में फल लगने लगते हैं और मई-जून की गर्मी में ये रसीले सेब पककर तैयार हो जाते हैं। माना जा रहा है कि बिहार में उपजे सेब का स्वाद भी अच्छा होगा। किसानों की आमद बढ़ाने में यह खेती बहुत लाभकारी हो सकता है। इसके मार्केटिंग चेन परकाम किया जा रहा है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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