जदयू की झोली में जाएगा बिहार विधान परिषद सभापति का पद, बीजेपी से बन गई सहमति
भाजपा के अवधेश नारायण सिंह के पहले जदयू एमएलसी देवेश चन्द्र ठाकुर करीब दो साल विधान परिषद के सभापति रहे हैं। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता तथा सभापति का पद छोड़ा।
भाजपा के बाद बिहार की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के खाते में बिहार विधान परिषद के सभापति का पद जाएगा। जल्द ही इस दल के कोई वरीय नेता इस शीर्ष पद पर अपना योगदान देते नजर आएंगे। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इसको लेकर एनडीए में और खासकर भाजपा तथा जदयू के बीच सहमति बन गई है। फिलहाल भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह विधान परिषद के सभापति हैं। दरअसल मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद नई सरकार के गठन के साथ ही जदयू खेमे में विधान परिषद सभापति का पद जाने की चर्चा शुरू हो गई थी। अभी मुख्यमंत्री के अलावा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति भाजपा कोटे से ही हैं। ऐसे में जदयू की स्वाभाविक दावेदारी के तहत परिषद सभापति का पद उसके पास आ रहा है।
पूर्व में जदयू के उपसभापति हारुण रसीद विधान परिषद के कार्यकारी सभापति के रूप में तकरीबन तीन साल काम कर चुके हैं। हालांकि तब प्रदेश में महागठबंधन की सरकार थी। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह के पहले जदयू एमएलसी देवेश चन्द्र ठाकुर करीब दो साल विधान परिषद के सभापति रहे हैं। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता तथा सभापति का पद छोड़ा। गौर हो कि पूर्व में एनडीए की सरकार में जब विप सभापति का पद भाजपा के पास था तो विधानसभा के अध्यक्ष जदयू कोटे से रहे।
अब जबकि डा. प्रेम कुमार विधानसभा के अध्यक्ष हैं तो एकबार फिर जदयू के किसी वरिष्ठ एमएलसी को सभापति का दायित्व मिलने जा रहा है। बताते चलें कि विधानसभा में अभी भाजपा के 88 जबकि जदयू के 85 विधायक हैं। वहीं, विधान परिषद में भाजपा के 25, जदयू के 20, राजद के 15, कांग्रेस के दो, निर्दलीय सात तथा सीपीआई, सीपीएम, हम, रालोमो, लोजपा आर रालोजपा के एक-एक सदस्य हैं।


