
अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी पर JDU हमलावर, नीरज ने पूछा- रीतलाल किस मठ के महंत
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की गिरफ्तारी से तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने घेरा है। कहा है कि राजद ने 76 प्रतिशत टिकट आपराधिक छवि के नेताओं को टिकट दिया है।
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले हॉट सीट मोकामा से जदयू प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर सियासत तेज हो गई है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि यह तो होना ही था। बिहार में महाजंगलराज की स्थिति है। जेडीयू ने तेजस्वी यादव के बयान पर जवाब देते हुए जेल में बंद दानापुर विधायक एवं राजद उम्मीदवार रीतलाल यादव पर नेता प्रतिपक्ष को घेरा है।

जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि मोकामा उनका जन्मस्थान है। 2005 के पहले यह क्षेत्र कत्लगाह बना हुआ था। बेटे की मौत पर पिता को रोने का अधिकार नहीं था। नीतीश कुमार की सरकार बनने के बाद यहां स्थिति में सुधार हुआ। जमीन विवाद को लेकर घटनाएं होती रहीं लेकिन बड़ी वारदात नहीं हईं। चुनाव से पहले जब बड़ी घटना हुई तो सरकार ने बिना भेदभाव के कार्रवाई कर दी। नीरज ने कहा कि उनकी सरकार अपराध की घटनाओं पर जाति, गोत्र, धर्म समुदाय देखती।
उन्होंने तेजस्वी यादव से का कि हमने तो कार्रवाई करके दिखा दिया पर आप क्या कर रहे हैं। रीतलाल यादव किस मठ के महंथ हैं। एडीआर की रिपोर्ट है कि राजद ने 76 प्रतिशत टिकट आपराधिक छवि के नेताओं को दिया है। राजद राजनीति में जंगलराज लाना चाहता है। लेकिन बिहार की जनता जानती है कि नीतीश कुमार हैं तो सब महफूज हैं,बेटियां उड़ान भरेंगी।
रविवार को अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि जिस तरीके से मोकामा में घटना हुई उसमें गिरफ्तारी जरूरी था। लेकिन पीएम बिहार आने वाले हैं फिर भी हत्या के कांड रुक नहीं रहे। यह गंभीर चिंता का विषय है।
30 अक्टूबर को चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा में जन सुराज के समर्थक और लालू यादव के करीबी दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। इस मामले में तेजस्वी यादव ने नामजद आरोपी अनंत सिंह पर कार्रवाई की मांग की। शनिवार की देर रात पुलिस ने अनंत सिंह को उनके बेढ़ना स्थित मार्केट से गिरफ्तार कर लिया। पटना एसएसपी परिसर स्थिति स्पेशल सेल में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। आज कोर्ट में पेश करने के बाद उन्हें जेल भेजा जा सकता है। इस मामले में चुनाव आयोग ने कड़ा एक्शन लिया है। अबतक पांच अधिकारियों पर गाज गिरी है।





