
बिहार के इस जिले में जनसुराज के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त, इन सीटों पर नोटा से भी कम वोट मिले
वैशाली जिले की महुआ, महनार, राघोपुर समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्दलयी प्रत्याशियों ने भी जनसुराज के प्रत्याशी से ज्यादा वोट हासिल किया। राघोपुर और महुआ में तो जनसुराज से ज्यादा वोट नोटा पर गिरे।
एनडीए की जिले में प्रचंड बहुमत का ही असर रहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में खुद को ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में प्रस्तुत करने वाली पार्टी जनसुराज की हवा निकल गई। वैशाली जिल में कोई भी प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सका। सोशल मीडिया की धमक, अपने खास अंदाज में चुना प्रचार, रोड-शो और रैलियों के बावजूद जनसुराज जनता के दिल में नहीं उतर पाई। जिले में जनसुराज के प्रदर्शन पर गौर करें तो वैशाली विधानसभा क्षेत्र -125 के प्रत्याशी को 3.83 फीसदी वोट मिले। वैशाली के जनसुराज के प्रत्याशी सुनील कुमार 9108 वोट को छोड़ कोई भी प्रत्याशी पांच हजार का आंकड़ा नहीं पार कर सका।
महुआ, महनार, राघोपुर समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्दलयी प्रत्याशियों ने भी जनसुराज के प्रत्याशी से ज्यादा वोट हासिल किया। राघोपुर और महुआ में तो जनसुराज से ज्यादा वोट नोटा पर गिरे। 123- विधानसभा क्षेत्र हाजीपुर में जनसुराज की प्रत्याशी प्रतिभा सिंह वैसे तो तीसरे स्थान पर रहीं, लेकिन कोई खास वोट नहीं काट सकीं।
उन्होंने हाजीपुर के भाजपा प्रत्याशी अवधेश सिंह के जीत के अंतर को कुछ कम जरूर किया। हाजीपुर में 4701 वोट के साथ प्रतिभा सिंह को 2.09 फीसदी मत मिले हैं। इसी तरह 124- लालगंज विधानसभा क्षेत्र में भी अमर कुमार सिंह सिर्फ वोट कटवा की भूमिका में रहे। यहां महागठबंधन की ओर से राजद प्रत्याशी शिवानी शुक्ला और एनडीए की ओर से भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह के बीच आमने-सामने की लड़ाई रही।
जनसुराज के प्रत्याशी ने सिर्फ लालगंज से जीत दर्ज करने वाले संजय सिंह के जीत के अंतर को कम किया है। लालगंज में 4215 वोट के साथ अमर कुमार सिंह चौथे स्थान पर रहे। उन्हें 1.75 फीसदी मतदाताओं ने पसंद किया। पातेपुर में तो जनसुराज ने पूर्व मंत्री दसई चौधरी पर दाव खेला था, लेकिन उनके इस दाव के बावजूद कोई खास असर नहीं देखने को मिला। मात्र 4181 वोट से ही पूर्व मंत्री को संतोष करना पड़ा।
वे 2.0 फीसदी वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। महनार विधानसभा क्षेत्र के इस चुनाव में जहां मुकाबला शुरू से ही एनडीए की ओर से जदयू प्रत्याशी उमेश सिंह कुशवाहा और महागठबंधन प्रत्याशी राजद के इंजीनियर रविन्द्र कुमार सिंह के बीच केंद्रित रहा।
जनसुराज के प्रत्याशी डॉ राजेश कुमार ने अपने सीमित वोटों से भी माहौल में हल्की हलचल लाई। भले ही जन सुराज को 4512 वोट मिले, पर इन वोटों का असर एनडीए पर देखा गया। कई बूथों पर यह चर्चा रही कि जनसुराज के उम्मीदवार ने ठीक वोट उसी जगह से खींचा जहां पहले से जदयू का मजबूत आधार था। डॉ. राजेश कुमार ने अपने सीमित प्रचार में स्थानीय मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं के रोजगार और स्वच्छ राजनीति को केंद्र में रखा।





