चर्चित उत्पाद दरोगा पर भी लग चुका है अवैध उगाही का आरोप
जमुई की एक विधवा महिला मीना देवी ने डीएम को आवेदन देकर उत्पाद विभाग के दरोगा मसूदन यादव पर जबरन वसूली करने का आरोप लगाया। मीना देवी ने बताया कि उन्हें 45000 रुपये देने के लिए धमकाया गया और पैसे न देने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। मामला गंभीर है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जमुई। टाउन थाना क्षेत्र के डोमनपुरा गांव की एक विधवा महिला मीना देवी ने डीएम को आवेदन देकर उत्पाद विभाग के एक चर्चित दरोगा पर जबरन वसूली करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने बताया था कि उत्पाद विभाग के दरोगा मसूदन यादव जवानों के साथ उनके घर पर जाकर शराब बेचने का आरोप लगाते हुए 45000 रुपया देने की मांग की थी। घटना 17 अप्रैल के शाम 7:00 बजे की बताई गई। महिला ने आरोप लगाया कि उत्पाद विभाग की टीम ने उन पर शराब बेचने का झूठा आरोप लगाते हुए जबरन बोलोरो गाड़ी में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
वहां जेल भेजने की धमकी देते हुए 45000 रुपए की मांग की गई। गरीबी का हवाला देने के बावजूद उन्होंने एक न सुनी। पीड़िता ने अपनी बेटी को फोन किया। पीड़िता ने बताया कि शराब कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति के खाते में फोन पे के माध्यम से 30000 रुपया ट्रांसफर कराए गए। पैसे मिलने के बाद करीब 10 बजे उन्हें छोड़ा गया। मीना देवी का आरोप बहुत ही गंभीर है। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शेष रकम के लिए फोन पर दोबारा धमकाया जा रहा है। झूठे केस में फंसने की धमकी दी जा रही है। पीड़िता ने ऑनलाइन भुगतान की रसीद और कॉल डिटेल भी उपलब्ध कराई है। आवेदन की प्रतिलिपि एसपी से लेकर उत्पाद विभाग के मुख्यालय को भेजी गई। हालांकि उत्पाद विभाग के दरोगा मसूदन यादव खुद को निर्दोष बताते हैं। यहां बता दें कि मसूदन यादव पूर्व में भी जमुई उत्पाद विभाग में कार्यरत रह चुके हैं और उन पर शराब माफियाओं से साथ गांठ लगने का भी आरोप लगाता रहा है। थोड़ा और फ्लैशबैक जाते हैं जदयू के जिला अध्यक्ष शैलेंद्र महतो के रिश्तेदार पर दबाव बनाकर उत्पाद विभाग की पुलिस ने पैसा वसूल किया था। शराब नहीं पीने के बावजूद शराब पीने का आरोप लगाकर भयभीत किया था। शिकायत के बाद तत्कालीन एसपी मदन कुमार आनंद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच करवाई थी। जांच में मामला को सही पाया गया था। फिर पैसा वसूलने वाले उत्पाद विभाग के दरोगा से पीड़ित व्यक्ति को पैसा वापस दिलाया गया था। हालांकि पुलिस के द्वारा आगे की कोई कार्रवाई नहीं की गई थी इस बार एस पी विश्वजीत दयाल किसी को बख्शने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।
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