सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझ बैठीं बच्चियां,खा ली

Newswrap हिन्दुस्तान, जमुई
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सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझ बैठीं बच्चियां,खा ली सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझ बैठीं बच्चियां,खा ली

सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझ बैठीं बच्चियां,खा ली

खैरा, निज संवाददाता थाना क्षेत्र के गम्हरिया गांव में मासूमियत एक दर्दनाक हादसे में बदल गई. सड़क किनारे पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझकर खाने वाली चार स्कूली सहेलियों में से एक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चियों का अस्पताल में इलाज जारी है। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और चिंता का माहौल है। मृत बच्ची की पहचान महेश ठाकुर की 12 वर्षीय पुत्री संजना कुमारी के रूप में हुई है, जो सातवीं कक्षा की छात्रा थी। बताया जाता है कि शनिवार दोपहर स्कूल से लौटने के बाद चारों बच्चियां घास काटने के लिए बहियार की ओर गई थीं। इसी दौरान पुल के समीप सड़क पर कागज में लिपटी सल्फास की गोली पड़ी मिली। बच्चियों ने उसे चॉकलेट समझकर आपस में बांट लिया और खा लिया। कुछ देर बाद सभी अपने-अपने घर लौट गईं, लेकिन शाम होते-होते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, जी मिचलाने और सिरदर्द की शिकायत होने पर परिजनों ने पूछताछ की, तब बच्चियों ने सल्फास खाने की बात बताई। इसके बाद आनन-फानन में सभी को इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल लाया गया।

घटना के बाद की स्थिति

चिकित्सकों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन संजना की हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर उपचार के लिए पटना रेफर किया गया। परिजन उसे पटना ले जाने के बजाय जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए, जहां देर शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं अन्य तीन बच्चियों की पहचान सहदेव ठाकुर की 13 वर्षीय पुत्री भारती कुमारी, सुनील ठाकुर की 12 वर्षीय पुत्री लवली कुमारी तथा रणधीर कुमार ठाकुर की 11 वर्षीय पुत्री शबनम कुमारी के रूप में हुई है। तीनों बच्चियों की हालत पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है। घटना ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। संजना छह भाई-बहनों में चौथे स्थान पर थी। वहीं लवली अपने पिता की सात बेटियों में सबसे छोटी है और शबनम अपने माता-पिता की इकलौती बेटी बताई जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि इस हादसे ने पूरे टोले को झकझोर कर रख दिया है।

गांव में शोक और चिंता

घटना के बाद कई सवाल भी उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बच्चियों ने करीब साढ़े चार बजे सल्फास खाया था, लेकिन उन्हें इलाज के लिए शाम आठ बजे के बाद अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का कहना है कि मांगोबंदर और नरियाना पुल बंद रहने के कारण उन्हें कोल्हुआ के रास्ते जमुई जाना पड़ा, जिससे काफी समय बर्बाद हो गया। उनका मानना है कि यदि रास्ता सुगम होता और समय पर इलाज मिल जाता तो शायद संजना की जान बचाई जा सकती थी। वहीं ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि खेत और सड़क किनारे सल्फास की गोली आखिर पहुंची कैसे। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद जब संजना का शव गांव पहुंचा तो परिजनों के करुण विलाप से माहौल गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण उसके घर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। उधर गांव के लोग अस्पताल में भर्ती तीनों बच्चियों के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। यह हादसा ग्रामीण इलाकों में जहरीले रसायनों के सुरक्षित रख-रखाव और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया है।

अधिक जानकारियाँ

यह हादसा कहाँ हुआ?
यह हादसा बिहार के गम्हरिया गांव में हुआ।

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