विद्यालय के भवन के लिए बच्चे आए समाहरणालय
जमुई । हिन्दुस्तान संवाददाता जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय धरमपुर के

जमुई । हिन्दुस्तान संवाददाता जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय धरमपुर के दर्जनों बच्चे अपने अभिभावकों और ग्रामीणों के साथ सोमवार की सुबह लगभग 6 बजे स्कूल परिसर से पैदल यात्रा पर निकल पड़े। बच्चों के हाथों में तख्तियां थीं और गूंजते नारे थे- "हमें ठेकेदार नहीं, हमें शिक्षा चाहिए", "पढ़ेंगे तो तभी बढ़ेंगे, तभी बनेंगे डॉक्टर-इंजीनियर"। बच्चों का यह कारवां करीब सात घंटे की पैदल यात्रा के बाद दोपहर लगभग 1 बजे जिला मुख्यालय पहुंचा। जहां जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा और मांगें रखीं। बच्चों और अभिभावकों का कहना है कि मध्य विद्यालय धरमपुर में करीब 300 बच्चों का नामांकन है, लेकिन विद्यालय की बुनियादी संरचना बेहद जर्जर है।
स्कूल में कुल तीन कमरे हैं, जिनमें से एक पहले ही पूरी तरह खराब हो चुका है। उस कमरे में पढ़ाई संभव नहीं होने के कारण बेंच-डेस्क को एक तरफ रख दिया गया है। शेष बचे कमरों में से एक में बच्चों की पढ़ाई कराई जाती है, जिसकी छत और दीवारें भी जर्जर हालत में हैं। अभिभावकों का कहना है कि कई बार छत से कंक्त्रीट के टुकड़े टूटकर नीचे गिरते हैं, जिससे बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। तीसरा कमरा प्रधानाध्यापक का है, जिसमें विद्यालय से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी सामान रखा जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार बच्चों को खुले आसमान के नीचे या सड़क किनारे बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है। इससे हमेशा डर बना रहता है कि कहीं तेज रफ्तार से गुजरने वाला कोई वाहन बच्चों को कुचल न दे। कभी छत गिरने का खतरा, तो कभी सड़क हादसे का डर। इन हालात में बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। अभिभावक राकेश कुमार ने बताया कि आमतौर पर बच्चे स्कूल जाने से बचने के लिए बहाने बनाते हैं, लेकिन इस विद्यालय के बच्चे खुद पढ़ने के लिए उत्सुक रहते हैं। वे अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं। बावजूद इसके, सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस विद्यालय की ओर नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि माता-पिता जबरदस्ती बच्चों को स्कूल भेजते हैं, लेकिन यहां बच्चे खुद स्कूल जाना चाहते हैं। यह शिक्षा के प्रति उनकी लगन को दर्शाता है। 65 वर्षीय गुडि़या कुमारी ने भावुक होते हुए कहा कि वे अपने पोता-पोती के लिए सुरक्षित और बेहतर भविष्य चाहती हैं। गांव के युवा और बुजुर्ग वर्षों से प्रयास कर रहे हैं कि बच्चों के लिए एक पक्का सरकारी विद्यालय भवन बन जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बच्चों और ग्रामीणों ने विधायक और सांसद से भी मुलाकात की, आवेदन दिए, लेकिन कहीं से कोई ठोस पहल नहीं हुई। राजाराम ने कहा कि वे सुबह 6 बजे बच्चों के साथ सिकंदरा से निकले थे ताकि जिलाधिकारी से मिलकर बच्चों के भविष्य की बात रख सकें। उनका आरोप है कि जिन जिम्मेदार पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बच्चों के भविष्य के लिए जागना चाहिए, वे अब भी सोए हुए हैं। भूपेश कुमार ने इसे पूरे जमुई जिले के लिए दुर्भाग्य बताया। उन्होंने कहा कि जमुई से हमेशा कोई न कोई मंत्री रहा है, इसके बावजूद आज भी बच्चों को न तो सुरक्षित विद्यालय भवन मिल पा रहा है और न ही बुनियादी सुविधाएं। यह स्थिति जिले के शिक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अंत में थक-हारकर अभिभावकों और बच्चों ने जिला प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द मध्य विद्यालय धरमपुर के लिए एक सुरक्षित, पक्का सरकारी भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चे बिना डर के पढ़ सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें। रामनरेश राम, शाहदेव प्रसाद, मुद्रिका मंडल , पंकज कुमार, नूतन देवी, पिंकी देवी ,अंजू देवी, जीता देवी मौजूद थी।

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