बदलते मौसम के मिजाज ने मक्का उत्पादकों की बढ़ाई परेशानी

हिन्दुस्तान, जमुई
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बदलते मौसम के मिजाज ने मक्का उत्पादकों की बढ़ाई परेशानी

जमुई। कार्यालय संवाददाता हाल के समय में मौसम के बदलते मिजाज ने मक्का किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इस साल आंधी तूफान कई बार आ चुका है जिसके कारण मक्के की फसल गिर चुका है। मक्के की फसल गिर जाने से पैदावार काफी कम होगी। किसान का कमर इस साल टूट चुकी है हमारी स्थिति इस साल काफी खराब हो चुकी है। क्योंकि फसल आंधी के कारण गिर चुका है। महाजन से पैसा लेकर खेती किए थे। मक्के की फसल की उपज अधिक होती है और पिछले साल रेट भी अच्छी थी जिसको देखकर इस बार खेती किया लेकिन इस साल नुकसान ही नुकसान है ।

लगातार आंधी-पानी से जहां मक्का फसल की तैयारी में परेशानी हो रही है वहीं खेतों में लगी मक्का की फसल को भी नुकसान पहुंच रहा है। बेमौसम हुईं बारिश से मक्का उत्पादक किसानों के अरमानों पर ग्रहण लग गया है। बेमौसम बारिश के कारण तैयार मक्का बारिश में भींग रहा है। मक्का उत्पादक किसान मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन, कम वर्षा, कीटों के हमले, और मंडियों में उचित मूल्य न मिलने से परेशान हैं। बिहार जैसे राज्यों में रबी सीजन में कम नमी, मिट्टी की उर्वरता में कमी और भण्डारण की कमी भी किसानों के लिए बड़ी चुनौतियां हैं, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है। अनियमित वर्षा और सूखा: मानसून पर निर्भरता के कारण, सूखे या असमय बारिश से फसल को भारी नुकसान होता है।अत्यधिक तापमान: 35°C से अधिक तापमान, विशेष रूप से फूल आने और दाना भरने के समय, मक्का के विकास को रोकता है और उत्पादकता घटाता है।मक्का फसल लगाए हुए हैं। मक्के की खेती में खर्च अधिक होती है। खेती करने में एक एकड़ में करीब 25 से 30 हजार रुपया की लागत लगती है । आमदनी की बात करें तो 1 एकड़ में करीब 70 से 80 हजार रुपया मुनाफा होता है। खेती करने में मेहनत ज्यादा है। पूंजी भी ज्यादा लगती है। इस साल आंधी तूफान ने मक्के की खेती को काफी नुकसान पहुंचाया है इस बार मुनाफा की जगह घाटा का सौदा हो रहा है । मक्के की खेती से कई फायदें हैं जलावन से लेकर पशु आहार पशु के खाने तक की सुविधा रहती है। इसके लिए मक्के की खेती करते हैं लेकिन मक्के की खेती इस साल नुकसान की खेती बन गई है। लागत अधिक लगता है। पटवन के ठीक दूसरे दिन आंधी आई पूरे खेत की मक्के को गिरा दिया है जिसके कारण अब मक्का मवेशी का चारा ही बन चुका है। सरकार द्वारा कोई राहत नहीं मिला।कहते हैं किसानहम किसान हैं। हम गेहूं, अरहर, मसूर, दलहन, तेलहन के साथ मक्के की भी खेती करते हैं। इस साल मक्के की खेती काफी ज्यादा किए थे। मक्के की खेती में खर्च अधिक लगती है और मेहनत भी काफी पड़ता है और आमदनी भी अच्छी है लेकिन आंधी तूफान ने आकर मनोबल को तोड़ दिया।बबलू सिंहआंधी से एक दिन पहले मक्के की सिंचाई किए थे जिसके कारण आंधी आई और सारा मक्का खेत में गिर गया जिसके कारण काफी क्षतिग्रस्त हुई है। अब उनका लागत भी निकलना मुश्किल है।छोटू सिंहमक्के की फसल गिर जाने से पैदावार काफी कम होगी। किसान का कमर इस साल टूट चुकी है हमारी स्थिति इस साल काफी खराब हो चुकी है। क्योंकि फसल आंधी के कारण गिर चुका है।मुकेश सिंहमक्के की फसल की उपज अधिक होती है और पिछले साल रेट भी अच्छी थी जिसको देखकर इस बार खेती किया लेकिन इस साल नुकसान ही नुकसान है । लगातार आंधी-पानी से जहां मक्का फसल की तैयारी में परेशानी हो रही है।पप्पू सिंहआमदनी की बात करें तो 1 एकड़ में करीब 70 से 80 हजार रुपया मुनाफा होता है। खेती करने में मेहनत ज्यादा है। पूंजी भी ज्यादा लगती है। इस साल आंधी तूफान ने मक्के की खेती को काफी नुकसान पहुंचाया है इस बार मुनाफा की जगह घाटा का सौदा हो रहा है ।पॉपिंस कुमार

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