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जल जमीन जंगल की सुरक्षा व संरक्षण मेरी नैतिक जिम्मेवारी-राजेन्द्र

जल जमीन जंगल की सुरक्षा व संरक्षण मेरी नैतिक जिम्मेवारी-राजेन्द्र जल जमीन जंगल की सुरक्षा व संरक्षण मेरी नैतिक...

जल जमीन जंगल की सुरक्षा व संरक्षण मेरी नैतिक जिम्मेवारी-राजेन्द्र
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,जमुईTue, 01 Nov 2022 01:01 AM
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सोनो, निज संवाददाता

जल जंगल व जमीन से मेरा अटूट रिश्ता रहा है ,और इनका संरक्षण व सुरक्षा मेरी नैतिक जिम्मेवारी है । उक्त बातें जल पुरुष के नाम विख्यात पर्यावरण विद्ध मैग्सेसे पुरस्कार से पुरस्कृत राजेन्द्र सिंह ने बरनार नदी बचाओ संघर्ष समिति के एक शिष्टमंडल के सदस्यों से भेंट के दौरान कही। बता दें कि बरनार नदी में हो रहे बालू उठाव के बाद उत्तपन्न पर्यावरण समस्या के निजात को लेकर बरनार बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया है, इस समिति में प्रखंड के राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावे समाज के प्रबुद्ध व पंचायत प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति के एक शिष्टमंडल प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष जमादार सिंह के नेतृत्व समिति के सदस्य रामचरित्र मंडल,महेंद्र दास, पंकज सिंह, कामदेव सिंह व विश्व पर्यावरण परिषद के सदस्य नंदलाल सिंह ने शनिवार को नालन्दा अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के सभागार में जल पुरुष राजेन्द्र सिंह से मिलकर बरनार नदी के अस्मिता की रक्षा के लिये अब तक किये गये प्रयास से अवगत कराते हुए आगे की रणनीति व आंदोलन के रूप रेखा पर चर्चा की । चर्चा के दौरान जल पुरूष श्री सिंह ने आंदोलन को अपनी समर्थन देते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होनें आंदोलन को न्यायोचित व समसामयिक बताते हुए कहा कि जल पर मानव का नैसर्गिक अधिकार है। अत: इस अधिकार से हमे कोई बंचित नहीं कर सकता उन्होंने वर्ष 2001 में उच्चतम न्यायालय द्वारा पर्यावरण सुरक्षा पर दिये गये एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि न्यायलय ने जल प्रवाह बाली नदियों से बालू उठाव को प्रतिबंधित करते हुए कहा है कि नदी नाला व जंगल के अस्तित्व के साथ हम छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं।अगर जल प्रवाहित बरनार नदी से सरकार द्वारा रेत उठाव की बन्दोबस्ती की गई है तो निश्चित रूप से विभाग द्वारा दी गई गलत प्रतिवेदन व मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने जल व रेत के संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि नदी जल का भंडार है और इसका प्रवाह हमारे जीवन के प्रभाह के तरह है। नदी की रेत मनुष्य के फेफड़े के समान है। अत: जिस प्रकार फेफड़े के विना मानव जीवन गतिहीन हो जाती है उसी प्रकार रेत के बिना नदी की स्थिति होती है जो कि मानव जीवन के लिये खतरे की घण्टी है। जल पुरुष से भेंट के बाद समिति के सदस्य मुखिया जमादार सिंह ने बताया कि जल पुरुष से मुलाकात बहुत ही सकारात्मक रहा उन्होंने आंदोलन में खुद को शिरकत करने का भरोषा दिया जिससे आंदोलन को एक नई ऊर्जा का संचार हुआ जो कि आंदोलन को ओर भी गतिशील बनायेगा।

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