DA Image
19 अक्तूबर, 2020|9:56|IST

अगली स्टोरी

काम नहीं, पलायन कर रहे मजदूर

default image

लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रदेशों से काफी संख्या में मजदूर घर वापस लौटे। इनमें से मात्र 20 फीसदी लोगों को भी सही से काम जिले में नहीं मिल पाया।

काम सही से नहीं मिलने के कारण मजदूर फिर से पलायन कर चुके हैं या तैयारी में हैं। बिहार व यूपी में काम कर रही 16 स्वंयसेवी संस्थाओं का संगठन है जो बाल मजदूरी, मानव तस्करी को रोकने के लिए काम करता है। वह भी जमुई जिले में कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। बहुत मजदूरों की गिनती हुई थी लेकिन हजारों ऐसे भी मजदूर थे जो भागकर सीधे घर पहुंच गये। उनकी गिनती भी नहीं हुई। इनमें से अधिकतर लोग वापस परदेस जाने के लिए तैयार हैं। कई तो चले भी गये।

अनियमित काम की वजह से मजदूर चले गए परदेश: जिले के मजदूरों को काम कभी मिलता है, कभी नहीं। मजदूरी भी काफी कम है। इस वजह से लोग पलायन के लिए विवश हैं। वहीं, सरकारी योजनाओं की जानकारी भी इस तबके तक कम ही पहुंच पाती है।

बाल श्रम रोकने के लिए कई विभाग के साथ साथ कई स्वयंसेवी संस्था भी काम कर रहे हैं। हालांकि, कोविड-19 से उपजे हालात के बाद प्रवासी मजदूरों की मदद भी की जा रही है। इनकी मांग है कि प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत 200 दिन काम मिलना चाहिए, घर-घर जाकर जॉब कार्ड बनाया जाए, सरकारी योजनाओं तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित करायी जाए।