नागी,नकटी व यक्षराज को नहीं नसीब हो सका पर्यटन का दर्जा

Apr 07, 2026 02:03 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, जमुई
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नागी,नकटी व यक्षराज को नहीं नसीब हो सका पर्यटन का दर्जा

झाझा, निज संवाददाता जमुई जिले के झाझा प्रखंड की चौहद्दी में सगी बहनों सरीखी पसरीं नागी एवं नकटी पक्षी आश्रयणियां देश के 81वें रामसर साइट्स के तमगे से नवाजी जा चूकी हैं। किंतु,उक्त वैश्विक हैसियत के गौरव से लैस होने के बावजूद पर्यटकों की सुविधा के नाम पर अभी भी ये आश्रयणियां विभागीय उपेक्षा व उदासीनता की शिकार नजर आती हैं। यह अफसोसजनक स्थिति भी तब है जब पर्यटन का क्षेत्र सरकार की प्राथमिकताओं में है। वैसे,जिम्मेदारों को छोरों से दावे-वादे तो खूब हुए,पर इसके उलट नागी,नकटी व यक्षराज को पर्यटन वाला मिजाज नसीब होने का आज भी इंतजार ही बना है।

यही हाल झाझा नप क्षेत्र में स्थित और अपने आंचल में पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे होने वाले यक्षराज स्थान का है। विश्व के महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (आईबीए) में शुमार नागी,नकटी की बावत यह बताने की जरूरत नहीं है कि यहां स्टूडेंट्स,स्कॉलर,रिसर्चर,पक्षी प्रेमी एवं पक्षी वैज्ञानिक व विशेषज्ञ के साथ-साथ आने को तो पर्यटक भी खूब आते हैं। किंतु,कुछ पल नागी,नकटी के ही आगोश में बीता कर,कुदरत व प्रकृति के उक्त अनमोल खजानों का जमकर आनंद लेने की ख्वाहिश लिए दूसरे शहरों,स्थानों से बड़ी उम्मीदों के साथ यहां धमकने वाले सैलानियों की उक्त हसरत,ठहरने के लिए यहां कोई बसेरा मयस्सर नहीं होने से पूरी नहीं हो पाती है। ऐसे में उन्हें चंद घंटों बाद ही उल्टे पांव अपने मुकाम को लौटना पड़ता है। यहां उनके ठहरने की असुविधा के अलावा नाश्ते-खाने आदि तक के कोई इंतजाम सुलभ नहीं है। इसके अलावा दूसरे प्रदेशों व स्थानों से आने वाले सैलानियों को नजदीकी रेलवे स्टेशन यथा झाझा व जमुई से यहां तक पहुंचने हेतु भी साधन सुलभ नहीं होते हैं।असुविधा व अभाव का आकलन करने आए तत्कालीन पर्यटन सचिव ने भी दिए थे कई सुझाव:ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने व इस क्रम में किस पर्यटन स्थल पर क्या अभाव व असुविधाएं हैं,इसका आकलने करने को ले विगत में नागी,नकटी का दौरा करने वाले तत्कालीन पर्यटन सचिव अभय कु.सिंह ने भी यहां ठहरने,खाने आदि के इंताजामात की जरूरत को रेखांकित किया था। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए एवं प्रमुख स्थानों पर होर्डिग्स के जरिए नागी,नकटी की बावत जरूरी जानकारी फ्लैश किए जाने की जरूरत बताई थी। समुचित सुविधाओं के अभाव के मद्देनजर नाराजगी व निराशा जताते कई प्रबुद्ध लोगों का कहना था कि झाझा में अन्य कोई पर्यटन स्थल का विकल्प नहीं होने की वजह से लोगों की भीड़ नागी,नकटी का रूख करती जरूर है,किंतु सुविधा-संसाधनों के अभाव में न तृप्ति हो पाती है,न संतुष्टि।न बर्ड म्यूजियम खुल पाया,न कैफेटेरिया:सालों बाद भी नागी का हाल यह है कि सैलानियों को यहां आवासन से लेकर भोजन तक का कोई भी इंतजाम तो अब तक भी नसीब नहीं हो पाया है। इसके अलावा झाझा विधायक दामोदर रावत की पहल के परिणाम स्वरूप नागी के समीप बर्ड म्यूजियम की स्थापना की स्वीकृति तो मिली किंतु सूत्रों के अनुसार फंड आदि की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उक्त महत्वाकांक्षी योजना लंबे अर्से से सिर्फ फाइलों की ही शोभा बढ़ा रही है। जानकारीनुसार,उक्त म्यूजियम को ले राजस्व विभाग द्वारा वन विभाग को जरूरत के मुताबिक भूखंड भी अर्से पूर्व ही ट्रांसफर किया जा चूका है। पर सरजमीं पर अब तक भी इस क्रम में कोई सुगबुगाहट तक नजर नहीं आने के सवाल पर डीएफओ तेजस जायसवाल विभाग से स्वीकृति के इंतजार की बात बताते हैं। हद यह कि नागी परिसर में कैफेटेरिया खोले जाने की योजना भी सालों बाद तक अमली जामा नहीं पहन पाई है। डीएफओ के अनुसार अब इसे इंटीग्रेटेड बर्ड म्यूजियम परिसर में ही बनाया जाएगा।नागी,नकटी की प्राकृतिक सुंदरता व रमणीक वातावरण के सीएम भी हुए थे कायल:नागी,नकटी की प्राकृतिक संुदरता व कुदरती खूबसूरती के तो खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कायल हुए थे। फरवरी,21 में नागी में परवान चढ़े सूबे के पहले पक्षी महोत्सव में शिरकत को पहुंचे सीएम ने भी प्रकृति की गोद में बसे नागी के रमणीक वातावरण से मोहित होते हुए माना था कि नागी अपने आंचल में ईको टूरिज्म की काफी संभावनाएं समेटे हुए है।सैलानियों को विभागीय मंत्रियों से ले अधिकारियों तक से मिलती आई है सिर्फ भरोसे की घूंटेंझाझा,नि.सं.नागी,नकटी को सजाने-संवारने और यहां सैलानियों की हर सुविधा के हर संसाधन मुहैया कराए जाने के वादे-दावे तो लोगों को तो खूब देखने-सुनने को मिले हैं। पूर्व विभागीय मंत्री से लेकर डीएफओ तक भी उक्त दोनों आश्रयणियों के बहुआयामी उन्नयन की योजनाएं पाइपलाइन में होने का जिक्र बीते कई सालों से अक्सर करते आए हैं। मंत्री तथा संप्रति बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ.प्रेम कुमार ने विभागीय मंत्री के रूप में नागी के अपने दौरे के दौरान इस संवाददाता के सवाल पर जहां यह भरोसा दिया था कि यहां योजनाबद्ध रूप से पर्यटकों की हर सुविधा का इंतजाम कराया जाएगा। उन्होंने तो यहां तक कहा था कि नागी,नकटी में आवश्यक सभी तरह के विकास का खाका खींचने व डीपीआर बनाने का काम कंसल्टेंट्स का पैनल बनाकर उसे सौंपा जाएगा। तो,बीते दिनों विभाग के मौजूदा मंत्री प्रमोद कुमार द्वारा भी नागी,नकटी समेत सूबे के अन्य रामसर साइट्स पर भी ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने को पर्यटन की सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराए जाने की बात सामने आई थी। उधर,करीब तीन साल पूर्व जहां जमुई के तत्कालीन डीएफओ पीयूष बर्णवाल ने यहां आने वाले सैलानियों को बोर्डिंग,फूडिंग से लेकर बोटिंग एवं बर्ड वाचिंग तक का एक समेकित (कॉम्पैक्ट) पैकेज मुहैया कराए जाने की योजना शीघ्र ही लागू किए जाने की बात बताई थी। तो,मौजूदा डीएफओ भी नागी समेत यक्षराज स्थान आदि के विकास संबंधी योजनाएं विभाग को काफी पूर्व से प्रेषित है,पर अब तक स्वीकृति अप्राप्त है। किंतु,अफसोसजनक यह कि ऐसी एक भी योजना अब तक सरजमीं पर साकार होती नहीं दिख पाई हैं। उधर,नागी,नकटी में बैटरी चालित नौकाएं,परिसर भ्रमण को छोटा वाहन एवं दिव्यांगजनों हेतु ट्राइसाइकिल की मांग सैलानियों की ओर से लंबे समय से की जाती रही है।

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